Kurud Sarpanch Sangh Meeting: "हस्ताक्षर केंद्र नहीं हैं पंचायतें", उपेक्षा पर भड़के 76 सरपंच, प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम
- moolchand sinha

- 1 day ago
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कुरूद।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की बुनियाद माने जाने वाले पंचायत प्रतिनिधियों ने अब अफसरशाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुरूद ब्लॉक मुख्यालय में आयोजित हुई Kurud Sarpanch Sangh Meeting में स्थानीय प्रशासन और विभागीय कार्यप्रणाली के खिलाफ जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्राम पंचायतों की लगातार हो रही उपेक्षा, विकास कार्यों में जानबूझकर किए जा रहे विलंब और पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों में सीधे हस्तक्षेप को लेकर बैठक में गहरा आक्रोश देखा गया। इस महत्वपूर्ण और विस्तारित बैठक में ब्लॉक के लगभग 76 सरपंचों ने एक सुर में ग्रामीण विकास और पंचायत स्वायत्तता की रक्षा के लिए हुंकार भरी।
दम तोड़ती ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिकारों पर चोट: Kurud Sarpanch Sangh Meeting की बड़ी बातें
इस बेहद अहम् Kurud Sarpanch Sangh Meeting की अध्यक्षता सरपंच संघ कुरूद के अध्यक्ष हरिशंकर साहू ने की। बैठक में जिला सरपंच संघ धमतरी के अध्यक्ष टिकेश साहू, संरक्षक श्रीमती पूर्णिमा साहू, जयमित्र साहू गोजी, पन्ना चंद्राकर, सचिव चेतन देवांगन एवं मीडिया प्रभारी योगेश साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मंच से बोलते हुए तमाम वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि पंचायतों को केवल कागजी अधिकारों के भरोसे छोड़कर वास्तविक निर्णय प्रक्रिया से दूर धकेला जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर तगड़ी नाराजगी जताई गई:
मजदूर और अन्नदाता परेशान: ग्राम पंचायतों से जुड़े निर्माण कार्यों और मनरेगा (MGNREGA) के कामों का मूल्यांकन व भुगतान प्रक्रिया इतनी धीमी है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का चक्र ही थम गया है। श्रमिकों को समय पर मजदूरी नहीं मिल पा रही है।
सरपंचों को बाईपास करने का खेल: राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और जॉब कार्ड जैसे महत्वपूर्ण व सीधे जनता से जुड़े कार्य पंचायत प्रतिनिधियों को भरोसे में लिए बिना सीधे विभागीय स्तर पर निपटाए जा रहे हैं। यह पंचायती राज व्यवस्था की मूल भावना का खुला उल्लंघन है।
16 महीने से जिला प्रशासन मौन, सिर्फ थोपे जा रहे निर्देश
इस Kurud Sarpanch Sangh Meeting में सरपंचों ने दर्द और नाराजगी बयां करते हुए कहा कि पंचायत कार्यकाल के लगभग 16 महीने बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा जिले के सरपंचों की कोई औपचारिक या समन्वय बैठक आयोजित नहीं की गई।
बैठक का मुख्य आक्रोश:
"प्रशासन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर केवल ग्राम सचिवों के माध्यम से अपने निर्देश थोप रहा है। हमें सिर्फ हस्ताक्षर करने तक सीमित कर दिया गया है। जनता के प्रति जवाबदेह हम हैं, अफसर नहीं!"
"गांव समृद्ध नहीं, तो कैसा विजन 2047?"
बैठक में देश के शीर्ष विकास एजेंडे पर भी तीखे सवाल उठाए गए। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि एक तरफ बड़े-बड़े मंचों से गांव को देश की आत्मा और भविष्य बताया जाता है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर ग्राम पंचायतों को पंगु बनाया जा रहा है। सरपंच संघ ने साफ कहा कि:
"जब तक देश के गांव और वहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक 'विकसित भारत' और 'विजन 2047' का सपना कभी सच नहीं हो सकता। देश की प्रगति का रास्ता ग्रामीण गलियारों से होकर ही गुजरता है।"
15 दिनों का अल्टीमेटम, वरना ठप होगा ब्लॉक
Kurud Sarpanch Sangh Meeting के अंत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जिला प्रशासन को 15 दिवस का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है। सरपंच संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय-सीमा के भीतर समस्याओं का त्वरित और ठोस समाधान नहीं हुआ, तो पंचायत स्वायत्तता और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पूरे ब्लॉक में चरणबद्ध तरीके से एक बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस संभावित टकराव और आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।




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