Dhamtari Road Accident: आंख में कीड़ा घुसते ही बिखर गई जिंदगी, पेड़ से टकराई बाइक; एक की मौत, दूसरा गंभीर है
- moolchand sinha

- 2 days ago
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नगरी (धमतरी)।
क्या कोई सोच सकता है कि रास्ते में उड़ता हुआ एक छोटा सा कीड़ा किसी हंसते-खेलते इंसान की जान ले लेगा? धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र से एक बेहद रूह कंपा देने वाला Dhamtari Road Accident सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। कुछ मिनट पहले तक जो दोस्त सफर में ठहाके लगा रहे थे, उनके बीच अचानक 'काल' की एंट्री होती है और पल भर में सब कुछ खत्म हो जाता है।
हंसी-मजाक का सफर... और गजकन्हार के पास पसरा सन्नाटा
यह कहानी है अमाली (नगरी) के रहने वाले तीन दोस्तों की—पेमन ध्रुव, रौशन यादव और हिथलेश। तीनों दोस्त गर्मियों के इस मौसम में घूमने के लिए धमतरी आए थे। दिनभर शहर में मस्ती करने के बाद उन्होंने मशहूर माडमसिल्ली बांध जाने का प्लान बनाया।
शाम ढल चुकी थी, ठंडी हवाएं चल रही थीं और तीनों बाइक पर सवार होकर वापस अपने घर लौट रहे थे। तभी गजकन्हार और कल्लेमेटा के बीच सूनी सड़क पर वो अनहोनी हुई, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।
अचानक आंख के सामने छा गया अंधेरा!
बाइक की रफ्तार तेज थी और हैंडल पेमन ध्रुव के हाथों में था। चश्मे या हेलमेट का शीशा न होने की वजह से अचानक एक उड़ता हुआ कीड़ा सीधे पेमन की आंख में जा घुसा।
आंख में तेज जलन हुई, पेमन ने झटके से पलकें बंद कीं और बस... महज 2 सेकंड के लिए नजर क्या धुंधली हुई, तेज रफ्तार बाइक सड़क किनारे खड़े एक भारी-भरकम पेड़ से जा टकराई।
टक्कर इतनी भीषण थी कि सन्नाटे को चीरती हुई आवाज गूंज उठी। इस भयानक Dhamtari Road Accident में बाइक के परखच्चे हवा में उड़ गए। पेमन और रौशन छिटककर पत्थरों पर जा गिरे। सिर और छाती पर गंभीर चोटें आने की वजह से दोनों खून से लथपथ हो गए।
💔 जिला अस्पताल में थमीं सांसें, अमाली गांव में चीख-पुकार
राहगीरों की सूचना पर तत्काल डायल 112 और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। दोनों लहूलुहान युवकों को आनन-आनं में सिविल अस्पताल नगरी ले जाया गया। डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखते हुए तुरंत उन्हें धमतरी जिला अस्पताल (Dhamtari News Today) रेफर कर दिया।
लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था। जिला अस्पताल की चौखट पर पहुंचते ही पेमन ध्रुव के शरीर ने हलचल बंद कर दी—डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस Dhamtari Road Accident ने पेमन की जिंदगी हमेशा के लिए छीन ली। वहीं, उसका दोस्त रौशन यादव इस वक्त जिंदगी और मौत के बीच अंतिम सांसें गिन रहा है, उसकी हालत बेहद नाजुक है। तीसरा दोस्त हिथलेश सुरक्षित तो है, लेकिन आंखों के सामने दोस्त की मौत देखकर वह गहरे सदमे (ट्रॉमा) में चला गया है।
सिस्टम पर सुलगते सवाल: 'रेफर' अस्पताल कब तक रहेगा नगरी? (H2)
इस दर्दनाक हादसे ने धमतरी के आदिवासी बाहुल्य नगरी क्षेत्र की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
गोल्डन ऑवर में सिर्फ सफर: ग्रामीणों का गुस्सा इस बात पर है कि नगरी में सिविल अस्पताल का बड़ा बोर्ड तो लगा है, लेकिन वेंटिलेटर, ट्रॉमा सेंटर और न्यूरोलॉजिस्ट न होने की वजह से हर गंभीर मरीज को 60 किलोमीटर दूर धमतरी या रायपुर भागना पड़ता है।
अगर इलाज यहीं मिलता तो...: स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि अगर पेमन को नगरी में ही तुरंत आईसीयू या हाईटेक इमरजेंसी ट्रीटमेंट मिल जाता, तो शायद आज वह जिंदा होता।
प्रशासन से सीधी मांग: इलाके के युवाओं और ग्रामीणों ने अब सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक नगरी में एक सर्वसुविधायुक्त हाईटेक ट्रॉमा सेंटर खोलने की मांग तेज कर दी है ताकि भविष्य में किसी और को ऐसे हादसों में जान न गंवानी पड़े।
नगरी पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन यह Dhamtari Road Accident हर उस बाइक चालक के लिए एक बड़ा सबक है जो बिना चश्मे या हेलमेट के हाईवे पर रफ्तार भरते हैं।
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