चमत्कार या विज्ञान! प्रज्ञा योग कार्यक्रम भखारा में बच्चों ने आँखों पर बंधी पट्टी के पार देखी दुनिया, अद्भुत प्रतिभा देख दंग रह गए लोग
- moolchand sinha

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भखारा/कुरूद।
क्या कोई आँखों पर गहरी काली पट्टी बांधकर किताब पढ़ सकता है? क्या बिना देखे कोई चित्रों में सटीक रंग भर सकता है या छिपी हुई वस्तुओं को पलक झपकते ही ढूंढ सकता है? भखारा में आयोजित प्रज्ञा योग कार्यक्रम भखारा में बच्चों ने अपनी इसी विस्मयकारी और अलौकिक क्षमता का लाइव प्रदर्शन कर हर किसी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
29 से 31 मई तक भखारा में चले इस त्रिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर के समापन पर बच्चों की इस विलक्षण प्रतिभा को देखकर पंडाल में मौजूद पालकों और अतिथियों की आँखें फटी की फटी रह गईं। प्रतिदिन दो घंटे संचालित इस विशेष सत्र में बच्चों ने न केवल एकाग्रता का प्रदर्शन किया, बल्कि मानव मस्तिष्क की असीम संभावनाओं को भी साबित किया।
प्रज्ञा योग कार्यक्रम भखारा के मुख्य लाभ
छठी इंद्री का जागरण: अध्यात्म और न्यूरोसाइंस का अनूठा संगम
दि आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी द्वारा विशेष रूप से डिजाइन किए गए इस इनट्यूशन (प्रज्ञा योग) कार्यक्रम को लेकर भखारा क्षेत्र में भारी उत्साह देखा गया।
कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक तामेश्वर साहू एवं गीतालक्ष्मी साहू ने इस चमत्कारी प्रतिभा के पीछे के विज्ञान को स्पष्ट करते हुए बताया:
"इनट्यूशन अर्थात प्रज्ञा योग कोई जादू-टोना नहीं, बल्कि हमारी 'छठी इंद्री' (सिक्स्थ सेंस) के जागरण का शुद्ध विज्ञान है। अमूमन मनुष्य इंद्रियों और बुद्धि से ज्ञान प्राप्त करता है, लेकिन प्रज्ञा चेतना के उस उच्चतम स्तर से आने वाला ज्ञान है, जहाँ सही समय पर सही विचार स्वतः स्फुरित होते हैं। इस तकनीक के नियमित अभ्यास से बच्चों की स्मरण शक्ति (फोटोग्राफिक मेमोरी), निर्णय क्षमता, आत्मविश्वास तथा अध्ययन में रुचि कई गुना बढ़ जाती है। साथ ही बच्चों का अनावश्यक भय दूर होता है और उनकी छिपी हुई प्रतिभाएं निखरकर सामने आती हैं।"
प्रशिक्षकों ने आगे बताया कि महज कुछ ही दिनों के अभ्यास से बच्चों के व्यवहार, एकाग्रता और आत्मविश्वास में क्रांतिकारी और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते हैं, जिसका लाइव उदाहरण भखारा के इस शिविर में देखने को मिला।
समाज के प्रबुद्ध जनों ने सराहा, बताया 'भविष्य के नागरिक निर्माण की नींव'
इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन को सफल बनाने में नगर के गणमान्य नागरिकों ने अपनी सक्रिय और महती भूमिका निभाई।
हरख जैन (पप्पू): "बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए ऐसे कार्यक्रम संजीवनी की तरह हैं। यह बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानने और उन्हें सही मंच देने का एक अनूठा प्रयास है। समाज के सभी पालकों को बच्चों के व्यक्तित्व विकास हेतु ऐसे आयोजनों में अनिवार्य रूप से सहभागिता करनी चाहिए।"
ब्रह्माकुमारी करुणा बहन (प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, शांति सेंटर): "हर बच्चा अपने भीतर दिव्य शक्तियों और विशेष गुणों का भंडार लेकर आता है। आध्यात्मिकता, ध्यान और सकारात्मक संस्कारों के माध्यम से इन सुप्त गुणों का विकास किया जा सकता है। बच्चों के उज्ज्वल एवं संस्कारवान भविष्य के लिए किए गए ऐसे प्रयास पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।"
इस भव्य आयोजन को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में डॉ. संतोष साहू, हिरेन्द्र साहू एवं बसंत बैस का विशेष और सराहनीय योगदान रहा। समापन पर प्रबुद्ध समाजसेवियों और पालकों ने एक स्वर में माना कि देश के श्रेष्ठ नागरिक निर्माण के लिए अध्यात्म और संस्कार का यह संगम आज के डिजिटल युग में बेहद अनिवार्य हो चुका है।



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