रामसागर तालाब में जलांजलि के दौरान डूबे संतोष कंवर का शव बरामद, 14 घंटे बाद खत्म हुई तलाश
- moolchand sinha

- 12 hours ago
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कुरूद।
शनिवार दोपहर से शुरू हुई बेचैनी, इंतजार और उम्मीदों का सिलसिला आखिर रविवार सुबह एक दर्दनाक खबर के साथ समाप्त हो गया। कुरूद के ऐतिहासिक रामसागर तालाब में जलांजलि के दौरान डूबे उमरदा निवासी संतोष कंवर (लगभग 40 वर्ष) का शव रविवार सुबह करीब 7:15 बजे गोताखोरों ने बरामद कर लिया। शव मिलने की सूचना के साथ ही तालाब किनारे जमा सैकड़ों लोगों के बीच सन्नाटा पसर गया और परिजनों की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला।
रविवार सुबह सूर्योदय से पहले ही रामसागर तालाब के आसपास महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों की भारी भीड़ जुट गई थी। हर किसी की निगाहें तालाब की ओर टिकी थीं और लोग संतोष कंवर के बारे में किसी खबर का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही गोताखोरों ने सुबह 7:15 बजे शव बरामद किया, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
रामसागर तालाब में जलांजलि के दौरान डूबे संतोष कंवर का शव सुबह 7:15 बजे बरामद
जानकारी के अनुसार ग्राम उमरदा निवासी एवं पेशे से राजमिस्त्री संतोष कंवर पारिवारिक दसगात्र कार्यक्रम में शामिल होने कुरूद आए थे। शनिवार दोपहर जलांजलि के दौरान वे रामसागर तालाब के गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते लापता हो गए। सूचना मिलते ही स्थानीय युवाओं ने तत्काल खोज अभियान शुरू कर दिया। बाद में पुलिस प्रशासन और गोताखोरों की टीम भी मौके पर पहुंची और देर रात तक लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
कुरूद थाना प्रभारी अवध राम साहू पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस बल के साथ मुस्तैदी से डटे रहे। उनकी निगरानी में पुलिस टीम ने रेस्क्यू अभियान, भीड़ नियंत्रण और आवश्यक व्यवस्थाओं को संभाला। वहीं धमतरी से पहुंचे अनुभवी गोताखोरों ने अथक प्रयास करते हुए रविवार सुबह शव बरामद किया।
घटनास्थल पर वंदेमातरम सेवा समिति एवं बोल बम सेवा समिति के अध्यक्ष भानु चंद्राकर के नेतृत्व में समिति के सदस्य पूरी घटना के दौरान सक्रिय रहे। शव बरामद होने के बाद समिति के कार्यकर्ताओं ने एम्बुलेंस वाहन उपलब्ध कराते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी तक पहुंचाने में सहयोग किया। दुख की इस घड़ी में समिति के सदस्यों ने परिजनों का संबल बनकर सामाजिक संवेदनशीलता और सेवा भावना का परिचय दिया।
शव बरामद होने के बाद पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। समाचार लिखे जाने तक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी थी।
घटनास्थल पर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की बड़ी संख्या मौजूद रही। उमरदा सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। संतोष कंवर अपने परिवार के भरण-पोषण का प्रमुख सहारा थे। उनके असमय निधन से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
रामसागर तालाब में हुई यह दर्दनाक घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बन गई, बल्कि पूरे कुरूद और उमरदा क्षेत्र को गहरे सदमे में छोड़ गई। तालाब किनारे रविवार सुबह का वह दृश्य लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा, जब सैकड़ों आंखें एक ही सवाल का जवाब तलाश रही थीं और अंत में उन्हें एक दर्दनाक सच का सामना करना पड़ा।
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