Two Brothers Save a Life Through Blood Donation: कुरुद में रक्त की कमी से रुका था महिला की बच्चादानी का ऑपरेशन, मसीहा बनकर पहुंचे दो सगे भाई
- moolchand sinha

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कुरुद।
धमतरी के खालसा अस्पताल में भर्ती कोर्रा (भखारा) की ग्रामीण महिला देवकी बाई की बच्चादानी का ऑपरेशन रक्त की भारी कमी के कारण ऐन वक्त पर रुक गया था। परेशान परिवार खून के इंतज़ाम के लिए भटक रहा था। जैसे ही इसकी जानकारी कुरुद महाविद्यालय के राज्य स्तरीय पुरस्कार विजेता छात्र मोजेश साहू को मिली, उन्होंने बिना देर किए अपने भाई ईशांत साहू के साथ अस्पताल पहुँचकर रक्तदान किया। दोनों भाइयों का यह प्रयास अब सोशल मीडिया पर Two Brothers Save a Life Through Blood Donation की एक सच्ची और प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आया है।
Two Brothers Save a Life Through Blood Donation खून की कमी से टलने वाला था बच्चादानी का गंभीर ऑपरेशन
दरअसल, कोर्रा (भखारा) की रहने वाली ग्रामीण महिला देवकी बाई पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार थीं। उन्हें इलाज के लिए कुरुद के खालसा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें बच्चादानी का ऑपरेशन कराने की सलाह दी।
तमाम तैयारियां हो चुकी थीं, लेकिन ऐन वक्त पर डॉक्टरों के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई। महिला के शरीर में रक्त (Blood) की भारी कमी थी। डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि जब तक जरूरी ग्रुप का खून नहीं मिल जाता, तब तक बच्चादानी का ऑपरेशन करना मुमकिन नहीं होगा। अस्पताल के गलियारे में खड़ा पीड़ित परिवार हर आने-जाने वाले से मदद की गुहार लगा रहा था, लेकिन खून का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। समय तेजी से बीत रहा था और महिला की जान खतरे में थी।
Two Brothers Save a Life Through Blood Donation: जब संकट में मसीहा बने मोजेश और ईशांत
जब इस गंभीर स्थिति की भनक संतगुरु घासीदास शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुरुद के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई के श्रेष्ठ स्वयंसेवक मोजेश कुमार साहू को लगी, तो उन्होंने एक पल की भी देरी नहीं की। मोजेश ने तुरंत अपने सगे भाई ईशांत साहू को साथ लिया और सीधे खालसा हॉस्पिटल पहुँच गए।
दोनों भाइयों ने बिना किसी हिचकिचाहट के आगे बढ़कर अपना रक्तदान किया। मोजेश और ईशांत के इस त्वरित और साहसी कदम के कारण डॉक्टरों ने तुरंत महिला का सफल ऑपरेशन शुरू किया। यही वजह है कि आज पूरे इलाके में चर्चा है कि कैसे Two Brothers Save a Life Through Blood Donation की इस मुहिम ने एक गरीब परिवार के घर का चिराग बुझने से बचा लिया।
मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित राज्य स्तरीय श्रेष्ठ स्वयंसेवक हैं मोजेश
आपको बता दें कि अनजान महिला के लिए फरिश्ता बनने वाले मोजेश साहू महाविद्यालय में एमएससी प्राणीशास्त्र चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र हैं। वे कुरुद कॉलेज की रासेयो इकाई के सबसे सक्रिय स्तंभ माने जाते हैं।
मोजेश ने केवल रक्तदान ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अंचलों में:
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण
मतदाता और एड्स जागरूकता
नशामुक्ति अभियान
और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को हमारे 'अन्नदाता' किसानों तक पहुँचाने में उल्लेखनीय कार्य किया है।
उनके इसी अद्वितीय सेवा भाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें सत्र 2024-25 के लिए मुख्यमंत्री के हाथों 'राज्य स्तरीय श्रेष्ठ स्वयंसेवक पुरस्कार' से भी नवाजा जा चुका है।
शिक्षा के साथ संस्कारों का मेल ही गढ़ता है 'मसीहा'
इस प्रेरणादायक घटना ने साबित कर दिया है कि किताबी शिक्षा के साथ-साथ जब युवाओं के भीतर सामाजिक उत्तरदायित्व और संस्कारों का बीजारोपण होता है, तभी एक श्रेष्ठ नागरिक का निर्माण होता है। आज कुरुद के प्रबुद्धजनों और शिक्षकों का भी यही मानना है कि हर छात्र को पढ़ाई के साथ-साथ समाज हित में अपना बहुमूल्य योगदान देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
आज देवकी बाई के परिवार की आंखों में बहते आंसू और दोनों भाइयों के चेहरे की मुस्कान चीख-चीख कर कह रही है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। कुरुद क्षेत्र के नागरिक और महाविद्यालय परिवार मोजेश और ईशांत के इस पुनीत कार्य की दिल खोलकर सराहना कर रहे हैं।




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