आदिवासी महिला से सामूहिक दुष्कर्म का मामला: बालोद पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
- moolchand sinha
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बालोद।
कानून के हाथ लंबे होते हैं, यह कहावत एक बार फिर सच साबित हुई है। बालोद जिले में एक आदिवासी महिला की अस्मत से खिलवाड़ करने वाले और उसे समाज में नीचा दिखाने की कोशिश करने वाले आरोपियों को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर धूल चटा दी है। जिला पुलिस कप्तान योगेश पटेल के कुशल नेतृत्व में, पुलिस ने न केवल आरोपियों को दबोचा, बल्कि उनके खिलाफ BNS और ST/SC एक्ट की ऐसी धाराएं लगाई हैं जिनसे बचना नामुमकिन है।
वारदात का खौफनाक मंजर
घटना 22 फरवरी 2026 की उस काली रात की है, जब करहीभदर गाँव के तीन युवकों—विकास सिन्हा, रोशन साहू और कमल सेन ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। पीड़ित महिला को जबरन अगवा कर सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहाँ घंटों तक उसके साथ सामूहिक बलात्कार (Gangrape) किया गया। आरोपियों ने महिला को शारीरिक चोटें पहुँचाईं और जातिगत गालियाँ देकर उसका मानसिक मनोबल तोड़ने का प्रयास किया।
पुलिस की 'सर्जिकल' स्ट्राइक
जैसे ही मामला पुलिस के संज्ञान में आया, महकमा हरकत में आ गया। एएसपी मोनिका ठाकुर , एसडीओपी बोनीफॉस एक्का और थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा के निर्देशन में साइबर सेल और थाना पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई। आधुनिक तकनीकी (Cyber Tracking) और मुखबिरों के जाल की मदद से मुख्य आरोपी विकास सिन्हा और कमल कुमार सेन को घेराबंदी कर धर दबोचा गया।
इन धाराओं में कसेगा कानूनी शिकंजा
पुलिस ने इस मामले में नई न्याय संहिता की कठोरतम धाराओं का प्रयोग किया है:
धारा 70 (1) BNS: सामूहिक दुष्कर्म के लिए कड़ा प्रावधान।
धारा 3(2)(V) ST/SC एक्ट: आदिवासी समाज के विरुद्ध अपराध पर उम्रकैद तक की सजा।
धारा 115(2) व 296 BNS: मारपीट और अश्लीलता के विरुद्ध कार्रवाई।
जांच टीम की सफलता
इस त्वरित कार्रवाई में साइबर प्रभारी धरम भुआर्य, और उनकी टीम (आरक्षक मोहन कोकिला, संजय सोनी, आदि) ने सराहनीय भूमिका निभाई। आरोपियों को फिलहाल ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
