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​[एक्सक्लूसिव] संवेदना की गूंज: जब सिस्टम से पहले 'साथी' पहुंचे अस्पताल, नन्हीं ईशा के लिए शिक्षक बने फरिश्ते


[रायपुर/कुरूद] |

जब इरादे नेक और [संवेदनाएं] जीवित हों, तो संगठन केवल अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ते, बल्कि परिवारों के लिए [रक्षा कवच] भी बनते हैं। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन (ब्लॉक कुरूद) के अभिन्न अंग [संवेदना सहायता समिति] ने अपनी स्थापना के मूल उद्देश्यों को चरितार्थ करते हुए यह साबित कर दिया है कि वे एक प्रोफेशनल बॉडी नहीं, बल्कि एक [जीता-जागता परिवार] हैं।


[₹20,000] की तत्काल संजीवनी: अस्पताल में छलकी ममता की आंखें

रायपुर के [नारायणा एमएमआई] अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही बालिका [ईशा सिंह ठाकुर] (सुपुत्री श्री गोपाल सिंह ठाकुर) के इलाज के लिए समिति ने मिसाल पेश की। समिति के पदाधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर ईशा की माता श्रीमती संजना सिंह ठाकुर को [₹20,000] की तत्काल आर्थिक सहयोग राशि भेंट की। यह केवल पैसा नहीं, बल्कि उस मां के लिए [नैतिक संबल] था जो अपनी बेटी की सलामती के लिए प्रार्थना कर रही है।

"संगठन की वास्तविक शक्ति एक-दूसरे के हाथ थामने में है। ईशा के उपचार के लिए यह छोटा सा प्रयास हमारे [सामूहिक संकल्प] का परिणाम है।"

— श्री लीलेश्वर ग्वाल, अध्यक्ष (संवेदना सहायता समिति)

आखिर क्यों चर्चा में है यह 'कुरूद मॉडल'?

[एनालिसिस]: आमतौर पर शिक्षक संगठन धरना-प्रदर्शन और वेतन विसंगति तक सीमित रहते हैं। लेकिन कुरूद की इस समिति ने [म्युचुअल फंड] की तर्ज पर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो संकट के समय 'लाइफलाइन' का काम करता है।

[इंस्टेंट रिलीफ]: अस्पताल में भर्ती होते ही बिना कागजी देरी के आर्थिक मदद।

[सुरक्षा घेरा]: सदस्य के असामयिक निधन पर परिवार को [₹40,000] की तत्काल सहायता का प्रावधान।

[इमोशनल बॉन्डिंग]: यह पहल शिक्षकों के बीच केवल पद का नहीं, बल्कि [रक्त के रिश्तों] जैसा जुड़ाव पैदा कर रही है।

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[शिक्षक या फरिश्ते?]: अस्पताल पहुंचकर ईशा की मदद के लिए शिक्षकों ने खोल दी तिजोरी।

[संकट में सहारा]:

जब बिटिया ईशा के इलाज के लिए पूरा फेडरेशन एक साथ खड़ा हो गया।

[फ्यूचर प्लान]:

छत्तीसगढ़ के शिक्षकों का यह सुरक्षा मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए नजीर।

[उपस्थिति] और दूरगामी विजन

इस पुनीत कार्य में समिति के अध्यक्ष लीलेश्वर ग्वाल, सचिव लच्छीराम साहू, डी.पी. साहू सहित वरिष्ठ सदस्य [शिवेंद्र सिंह ठाकुर, हरिशंकर सेन, शेखन राम साहू, चेतन राम साहू, फालेश्वर कुर्रे एवं शंकरदास मानिकपुरी] ने अस्पताल पहुंचकर परिजनों का ढांढस बंधाया।

ब्लॉक अध्यक्ष [लुकेश राम साहू] ने इस सफल पहल का श्रेय हुलेश चंद्राकर, रामेश्वर साहू और ओंकार साहू जैसे वरिष्ठों की [दूरगामी सोच] को दिया। उन्होंने अपील की है कि हर साथी इस [सुरक्षा कवच] से जुड़े ताकि कोई भी परिवार खुद को अकेला न पाए।

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