धमतरी की बेटियों ने रचा ‘हरित संकल्प’ का इतिहास अमेरिका, बड़ौदा और नागपुर से जुड़कर जेल परिसर में लगाया पर्यावरण का बीज
- moolchand sinha

- 11 hours ago
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कुरूद।
हजारों किलोमीटर की दूरी… तीन अलग-अलग शहर… और एक ही धड़कन—धमतरी।
जब अमेरिका, बड़ौदा और नागपुर से जुड़ी तीन बेटियों ने अपनी जन्मभूमि के लिए हरियाली का संकल्प लिया, तो जिला जेल धमतरी का परिसर केवल पौधों से नहीं, बल्कि भावनाओं से भी हरा हो उठा।
यह कोई सामान्य पौधारोपण कार्यक्रम नहीं था—यह था स्मृतियों, संस्कारों और जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण। जहां एक ओर जेल की दीवारें सुधार और अनुशासन की प्रतीक हैं, वहीं अब वही परिसर हरित भविष्य की प्रयोगशाला बनता दिख रहा है।
जेल अधीक्षक नरेंद्र कुमार डहरिया के शब्दों में—
“जेल केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, संस्कार और हरित भविष्य की प्रयोगशाला है।”
‘सार्थक ग्रीन धमतरी’ की पहल ने इस सोच को जमीन पर उतारते हुए 56 छायादार एवं फलदार पौधे ट्री-गार्ड सहित रोपित किए हैं। लेकिन इस अभियान की सबसे भावुक कड़ी तब जुड़ी, जब पूर्व विधायक जया बेन दोशी की पौत्री रूपा, श्रद्धा और सपना ने दूर रहकर भी अपनी मिट्टी से नाता निभाया।
यह कहानी बताती है—
🌎 दूरी चाहे जितनी हो,
🌱 जड़ें वहीं मजबूत होती हैं जहां से जीवन ने आकार लिया हो।
धमतरी आज केवल एक शहर नहीं, बल्कि बेटियों के हरित समर्पण की मिसाल बन चुका है।

तीन शहर, तीन बेटियां, एक धमतरी
लॉस एंजेल्स (अमेरिका) से जुड़ा मातृभूमि का रिश्ता
लॉस एंजेल्स में निवासरत, धमतरी की पूर्व विधायक जया बेन दोशी की पौत्री श्रीमती रूपा दिपेन भुआ ने अपनी सास-ससुर की स्मृति में एक काजू का पौधा समर्पित किया—यह संदेश देते हुए कि दूरी संवेदनाओं को कम नहीं कर सकती।
बड़ौदा से सम्मान का संकल्प
बड़ौदा निवासी श्रद्धा राजेश साहू ने अपने माता-पिता और सास-ससुर के सम्मान में दो पौधे लगवाए। उनकी माता श्रीमती लक्ष्मी साहू (पूर्व प्राचार्य) ने स्वयं जेल परिसर में उपस्थित होकर पौधारोपण किया।
नागपुर से वैज्ञानिक दृष्टि का साथ
स्व. डॉ. के.एल. चंद्राकर की पुत्री सपना धुरंधर ने अपने पति अशोकादित्य धुरंधर (ग्लोबल हेड – एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग, बथवाल कॉरपोरेशन, कोलकाता) और पुत्र विशु के साथ नागपुर से आकर चौथा पौधा रोपा।
‘सार्थक ग्रीन धमतरी’: 3500 पौधों का हरित इतिहास
संस्था की संयोजिका डॉ. सरिता दोशी ने बताया कि वर्ष 2010 से अब तक धमतरी और आसपास के क्षेत्रों में 3500 से अधिक पौधे ट्री-गार्ड सहित लगाए जा चुके हैं, जो आज विशाल वृक्ष बन चुके हैं। इस अभियान में वन विभाग के वनपाल राकेश तिवारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।








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