कुरुद ईद भाईचारा: जब ईदगाह में एक साथ जुटी सियासी और सामाजिक हस्तियां
- moolchand sinha

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कुरुद (छत्तीसगढ़)।
पवित्र रमजान के 30 दिनों की इबादत के बाद शनिवार को कुरुद नगर में 'कुरुद ईद भाईचारा' की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने प्रदेशभर का ध्यान खींचा है। यहाँ केवल त्यौहार नहीं मनाया गया, बल्कि सियासी दलों और समाज के हर वर्ग ने एक साथ बैठकर 'मिठी सेवइयों' के साथ आपसी रिश्तों की मिठास को और गहरा किया।
कुरुद ईद भाईचारा की एक अद्भुत और ऐतिहासिक मिसाल
शनिवार की सुबह कुरुद का ईदगाह मैदान अकीदतमंदों से भर गया। हाफिज शेख अमानुल्लाह कादरी ने ईदुल फितर की नमाज अदा कराई। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि इस्लाम केवल शांति और मानवता का संदेश देता है। नमाज के बाद पूरे 'कुरुद और छत्तीसगढ़' की खुशहाली के लिए दुआ मांगी गई।
नूरानी यंग वेलफेयर कमेटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में नमाज के बाद 'सलातो सलाम' पेश किया गया। इसके बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने कब्रिस्तान और मजारों पर जाकर अपने 'मरहुमीन' (पूर्वजों) के लिए फातेहा पढ़ी, जो उनकी आस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सियासी दलों का जमावड़ा और 'कुरुद भाईचारा' की जीत
इस बार की ईद में कुरुद की 'गंगा-जमुनी तहजीब' और भी मुखर होकर सामने आई।
विधायक अजय चंद्राकर ने आधुनिक संचार माध्यमों से ईद की हार्दिक बधाई प्रेषित की।
उनके प्रतिनिधि भानु चंद्राकर, वरिष्ठ कांग्रेसी नीलम चंद्राकर, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष महिम शुक्ला, पार्षद मनीष साहू और आशीष शर्मा ने ईदगाह पहुंचकर मुस्लिम भाइयों को गले लगाया और त्यौहार की खुशियां साझा कीं।
नेताओं ने समाज के बुजुर्गों के साथ बैठकर सेवइयों का लुत्फ उठाया, जो यह दर्शाता है कि कुरुद में सामाजिक समरसता किसी भी राजनीति से ऊपर है।
शिक्षा और विकास: 'एक रोटी कम खाओ, बच्चों को जरूर पढ़ाओ'
kurud eid bhaichara
समाज सुधार की दिशा में इस ईद पर एक बड़ा कदम उठाया गया। आल मुस्लिम वेलफेयर फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष सलामत अशरफी ने बच्चों को कलम और टॉफी भेंट कर उन्हें शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित किया। उनका नारा "एक रोटी कम खाओ, लेकिन बच्चों को जरूर पढ़ाओ" पूरे नगर में चर्चा का विषय रहा।
नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर की ओर से उनके प्रतिनिधि ने कब्रिस्तान में सीसी रोड और सौंदर्यीकरण कार्य जल्द शुरू करने की घोषणा कर समाज को ईद का बेहतरीन तोहफा दिया।
इबादत का सफर और समाज की भागीदारी
रमजान के दौरान मस्जिद हॉल में 30 दिनों तक रोजा इफ्तार और तरावीह की विशेष नमाज का प्रबंध किया गया। 10 दिनों तक 'ऐतेकाफ' में बैठे ताहीर रजा का समाज प्रमुखों—अय्यूब खान, गफ्फार हलारी, मोज्जम शाहबुद्दीन और जमाल रिजवी—ने आत्मीय स्वागत किया।
इस मौके पर हाजी सै. हसन अली, सुलेमान हलारी, शेख बब्बू, हकीम खान, लतीफ उस्मानी, जिकर भाई, कासम अली सहित भारी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
निष्कर्ष: कुरुद की यह ईद न केवल धार्मिक आस्था का पर्व रही, बल्कि इसने सामाजिक एकता, शिक्षा का संकल्प और विकास की नई इबारत भी लिखी।




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