top of page

कुरूद में चना खरीदी भ्रष्टाचार | NAFED में नजराना खेल उजागर



कुरूद।

कुरूद क्षेत्र की सोसायटियों में इन दिनों एक अजीब सा सन्नाटा पसरा है—यह सन्नाटा शांति का नहीं, बल्कि उस 'मजबूरी' का है जो भ्रष्टाचार के दबाव में पैदा हुई है। NAFED (भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित) के बैनर तले हो रही चना खरीदी अब 'सेवा' नहीं, बल्कि 'सौदा' बन चुकी है। किसानों का आरोप है कि यहाँ तौल मशीन की सुई तब तक नहीं हिलती, जब तक उस पर 'भ्रष्टाचार का ग्रीस' यानी नजराना और उपहार न चढ़ाया जाए।

कुरूद चना खरीदी भ्रष्टाचार: किसानों की परेशानी

हकीकत यह है कि कुरूद का किसान आज डरा हुआ है। वह भ्रष्टाचार के खिलाफ चिल्लाना तो चाहता है, लेकिन सिस्टम की जकड़न उसे चुप करा देती है।

सिस्टम का डर: किसानों को डर दिखाया जाता है कि अगर उन्होंने 'भेंट' नहीं दी, तो चने में 'नमी' या 'बदरा' (खराब दाना) बताकर उसे लौटा दिया जाएगा।

अघोषित कमीशन: सोसायटियों में एक गुप्त 'रेट लिस्ट' चल रही है। जो किसान चुपचाप 'सेवा' कर देता है, उसका चना पलक झपकते तुल जाता है, जबकि स्वाभिमानी किसान कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते-करते थक रहा है।

प्रशासन की 'प्रेरणा' बनाम धरातल की 'प्रताड़ना'

यह विरोधाभास हैरान करने वाला है। एक ओर धमतरी जिला प्रशासन सोशल मीडिया और विज्ञापनों के जरिए किसानों को चने की खेती के लिए 'प्रोत्साहित' कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खरीदी केंद्रों पर बैठा तंत्र उन्हें 'प्रताड़ित' कर रहा है।

"क्या प्रशासन की मंशा केवल कागजों में नंबर बढ़ाने तक सीमित है? अगर नहीं, तो इन केंद्रों पर चल रही 'वसूली की दुकानों' पर ताला क्यों नहीं लग रहा?"

राजनीतिक दलों को ललकार: क्या आप केवल 'फोटो' खिंचवाने के लिए हैं?

कुरूद के जागरूक नागरिक अब क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

सत्ता पक्ष:

क्या सरकार के प्रतिनिधि यह देख पा रहे हैं कि उनके नाक के नीचे NAFED की खरीदी में क्या गुल खिलाए जा रहे हैं?

विपक्ष: क्या विपक्ष केवल प्रेस नोट जारी करेगा या इन केंद्रों पर 'औचक निरीक्षण' (Surprise Inspection) कर किसानों को इंसाफ दिलाएगा?

चुनौती:

यदि कोई भी दल आज बिना बताए इन केंद्रों पर दबिश दे, तो उसे तौल काटों के पीछे छिपे भ्रष्टाचार की फाइलें खुली मिलेंगी।

NAFED की साख दांव पर: पारदर्शी खरीदी के लिए 3 जरूरी कदम

अगर प्रशासन वास्तव में किसानों का हित चाहता है, तो उसे ये कदम तुरंत उठाने होंगे:

गोपनीय फ्लाइंग स्क्वाड: कलेक्टर द्वारा गठित एक विशेष टीम, जो किसान बनकर केंद्रों पर जाए।

किसान संवाद:

खरीदी केंद्र पर मौजूद हर किसान से एकांत में फीडबैक लिया जाए।

डिजिटल मॉनिटरिंग: तौल के समय के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की रैंडम चेकिंग हो।


कुरूद का अन्नदाता अपनी मेहनत की कमाई में से 'हिस्सा' देने को मजबूर है। यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि किसान के स्वाभिमान पर चोट है। प्रशासन और राजनीतिक दलों का मौन इस अपराध में उनकी मौन सहमति माना जाएगा। वक्त आ गया है कि इस 'भेंट संस्कृति' को जड़ से उखाड़ फेंका जाए।

Comments


bottom of page