"किसानों के घर पुलिसिया अंदाज में छापे क्यों?" धान खरीदी के अंतिम दौर में कांग्रेस का 'अल्टीमेटम', तारिणी चंद्राकर बोलीं- बंद करो अन्नदाता का अपमान
- moolchand sinha

- Jan 17
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(धमतरी/कुरुद) |
धान खरीदी का अंतिम पखवाड़ा धमतरी जिले में अब 'संग्राम' का रूप ले चुका है। 31 जनवरी की डेडलाइन सिर पर है, लेकिन केंद्रों पर धान बेचने से ज्यादा चर्चा प्रशासन की 'सख्ती' और 'छापेमारी' की हो रही है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने साय सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे "किसानों को अपराधी घोषित करने की साजिश" करार दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि प्रशासन ने किसानों के घरों में तांक-झांक और अपमानजनक फोटोग्राफी बंद नहीं की, तो कांग्रेस जिले में धान परिवहन का चक्का जाम कर देगी।
अपराधी की तरह खड़ा कर खींची जा रही फोटो
तारिणी चंद्राकर ने अपने बयान में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले "एक-एक दाना" खरीदने का वादा किया था, लेकिन अब जब वादा निभाने का वक्त आया, तो सरकार "नित-नए पैंतरे" आजमा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया, "क्या किसान ने खेती करके कोई गुनाह किया है? जांच के नाम पर उनके बेडरूम और कोठार तक पहुंचना, उन्हें मुजरिमों की तरह खड़ा करके फोटो खींचना और स्टॉक मिलान के नाम पर मानसिक प्रताड़ना देना—यह अन्नदाता का अपमान नहीं तो और क्या है?"
बीज से लेकर बाज़ार तक... सिर्फ धोखा
कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूरे सीजन का चिट्ठा खोल दिया है। बयान में कहा गया कि यह वही किसान है जिसे:
बोनी के समय बीज नहीं मिला, महंगे दामों में बाहर से खरीदना पड़ा।
फसल के समय खाद की किल्लत हुई, दोगुनी कीमत चुकानी पड़ी।
और अब बेचने के समय नमी, लिमिट और सर्वर का बहाना बनाया जा रहा है। तारिणी चंद्राकर ने कहा कि सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए अब तकनीकी दिक्कतों का सहारा ले रही है, ताकि अपने "व्यापारी मित्रों" को फायदा पहुंचाया जा सके।
31 जनवरी की समय-सीमा और लिमिट का पेंच
16 जनवरी बीत चुकी है और अभी भी हजारों किसान अपनी उपज बेचने की बाट जोह रहे हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि वर्तमान में तय की गई 'लिमिट' (प्रति एकड़ खरीदी सीमा) को तत्काल बढ़ाया जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो 31 जनवरी तक सभी किसानों का धान बिकना असंभव है।
प्रशासन को सीधी चेतावनी: अब होगा आंदोलन
कांग्रेस ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। यदि टोकन वितरण में देरी और बेवजह की नियम-कायदों वाली सख्ती से किसानों को राहत नहीं मिली, तो कांग्रेस "उग्र आंदोलन" के लिए बाध्य होगी। तारिणी चंद्राकर ने चेतावनी दी है कि इस बार आंदोलन सड़कों पर नहीं, बल्कि धान परिवहन रोककर किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।








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