कुरुद का 'ग्रीन कवच': अजय चंद्राकर का विजन बना मिसाल, अब गांवों में सांस लेंगे 'प्राकृतिक फेफड़े'
- moolchand sinha

- 12 hours ago
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कुरुद/धमतरी:
जहां दुनिया कंक्रीट के जंगलों की ओर भाग रही है, वहीं छत्तीसगढ़ का कुरुद विधानसभा क्षेत्र अपनी 'मिट्टी और हवा' को सहेजने की एक अनोखी क्रांति का गवाह बन रहा है। पूर्व मंत्री और विधायक अजय चंद्राकर के 'ग्रीन कुरुद-क्लीन कुरुद' अभियान के तहत अब ऑक्सीजोन के बाद 'विलेज गार्डन' और 'ईको-विलेज' की तैयारी शुरू हो गई है।
समाचार का मुख्य सार (News Highlights)
बजट आवंटन: धमतरी वनमंडल के लिए ₹45 लाख की विशेष राशि स्वीकृत।
मॉडल गांव: परखंदा, सेमरा बी और मेधा बनेंगे प्रदेश के नए ईको-टूरिज्म हब।
दोहरा लाभ: पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर।
विकास और प्रकृति का 'परफेक्ट बैलेंस'
विधायक अजय चंद्राकर का मानना है कि "वृक्ष ही जीवन का असली बीमा हैं।" इसी संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए धमतरी के तीन प्रमुख गांवों को चुना गया है। यह परियोजना केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक Micro-climate (सूक्ष्म जलवायु) सुधारने की वैज्ञानिक पहल है।
इन तीन गांवों की बदलेगी तस्वीर:
ग्राम परखंदा एवं सेमरा बी: यहाँ ₹15-15 लाख की लागत से बनने वाले उद्यान 'औषधीय और छायादार' पौधों के संरक्षण केंद्र बनेंगे। यह बुजुर्गों के लिए 'शुद्ध ऑक्सीजन हब' और बच्चों के लिए प्रकृति की पाठशाला का काम करेंगे।
ग्राम मेधा (उत्तर सिंगपुर): यहाँ ईको-टूरिज्म पर फोकस किया जाएगा। प्राकृतिक सौंदर्य को सहेजते हुए इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे शहरों जैसा आकर्षण गांवों में ही मिल सके।
बजट का गणित: पर्यावरण के साथ रोजगार भी
इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबी इसका रोजगारोन्मुख (Employment-oriented) होना है। आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर मजदूरी के रूप में स्थानीय लोगों के पास जाएगा।स्थल का नाम कुल राशि (लाख में) मजदूरी (रोजगार) सामग्री एवं पूर्ति
ग्राम परखंदा ₹15.00
ग्राम सेमरा बी ₹15.00
ग्राम मेधा ₹15.00
अजय चंद्राकर का संदेश: "प्रकृति की रक्षा, हमारी सुरक्षा"
अजय चंद्राकर ने इस पहल के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि आने वाली पीढ़ियों को हम केवल विरासत में पैसा नहीं, बल्कि 'सांस लेने योग्य हवा' भी देकर जाएं। उनका यह ईको-विलेज मॉडल ग्रामीण भारत के लिए एक नया रोडमैप तैयार कर रहा है, जहाँ आधुनिकता और प्राचीन प्राकृतिक संतुलन साथ-साथ चलते हैं।
"हर पौधा केवल पेड़ नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन की सुरक्षा है।" — अजय चंद्राकर








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