कुरूद: शिक्षा के मंदिर में 'सत्ता के मद' का तांडव, तकनीकी सहायक ने शिक्षकों और बच्चों को दी गालियां; शिक्षकों ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
- moolchand sinha

- 20 hours ago
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[कुरूद, धमतरी] —
छत्तीसगढ़ के कुरूद जनपद में एक प्रशासनिक कर्मचारी की 'अधिकारी वाली हनक' ने मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। शासकीय प्राथमिक शाला उमरदा उस समय रणक्षेत्र बन गया जब जनपद पंचायत की तकनीकी सहायक नगमा फातिमा ने स्कूल परिसर में घुसकर शिक्षकों और मासूम बच्चों पर अभद्र गालियों की बौछार कर दी। घटना के बाद पूरे विकासखंड के शिक्षकों में भारी आक्रोश है और उन्होंने शासन-प्रशासन के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
लंच ब्रेक बना विवाद की वजह: 'अधिकारी' ने खोया आपा
घटना दोपहर लगभग 1:15 बजे की है, जब स्कूल में मध्याह्न भोजन (लंच) का अवकाश चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तकनीकी सहायक नगमा फातिमा अचानक स्कूल पहुँचीं और बच्चों को बाहर देखकर आगबबूला हो गईं। उन्होंने शिक्षकों को सरेआम फटकारते हुए कहा, "तमीज नहीं है क्या? बच्चों को बिठाकर नहीं रख सकते?" जब प्रधान पाठक ने शालीनता से जवाब दिया कि अभी लंच ब्रेक चल रहा है, तो मैडम का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने पद की धौंस दिखाते हुए चिल्लाकर कहा, "मैं जनपद की अधिकारी हूँ, मुझे सिखाओगे?"
मासूम बच्चों और गुरुओं पर गालियों की बौछार
यह विवाद महज बहस तक सीमित नहीं रहा। आरोप है कि तकनीकी सहायक ने वहां उपस्थित रसोइयों और डरे-सहमे बच्चों के सामने ही शिक्षकों को भद्दी-भद्दी गालियां देनी शुरू कर दीं। जब अन्य शिक्षकों ने बीच-बचाव करते हुए गाली-गलौज करने से मना किया, तो उन्हें भी 'बदतमीज' कहकर अपमानित किया गया। शिक्षा के मंदिर में एक शासकीय सेवक द्वारा किया गया यह कृत्य न केवल अमानवीय है, बल्कि सेवा नियमों का खुला उल्लंघन भी है।
प्रशासनिक अमले में खलबली: शिक्षक संगठन ने घेरा
घटना के तुरंत बाद इसकी सूचना एसडीएम, बीईओ और अन्य उच्चाधिकारियों को दी गई। शिक्षक संगठन (छ.ग. टीचर्स एसोसिएशन) ने इस अपमान को गंभीरता से लेते हुए विधायक, एसडीएम और सीईओ को कड़ा ज्ञापन सौंपा है।
प्रमुख मांगें और चेतावनी:
दोषी कर्मचारी पर तत्काल निलंबन की कार्यवाही: संगठन का कहना है कि जिस कर्मचारी को बात करने का सलीका नहीं, वह पद पर रहने योग्य नहीं है।
48 घंटे का अल्टीमेटम:
शिक्षकों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 2 दिनों के भीतर सख्त एक्शन नहीं लिया गया, तो पूरा संगठन जनपद पंचायत का घेराव करेगा और काम बंद कर देगा।
मैदान में उतरे संगठन के दिग्गज
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व दिनेश साहू (अध्यक्ष, छ.ग. टीचर्स एसोसिएशन) कर रहे हैं। उनके साथ अशोक साहू (ब्लॉक सचिव), लोमश साहू, एन.आर. बघेल (जिला उपाध्यक्ष), प्रमोद सिन्हा, पूर्णानंद यादव, तुकेश्वर गहिरवारे, श्रीमती पद्मिनी सिन्हा और अन्य पदाधिकारियों ने एक सुर में कहा कि गुरुओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्यों गंभीर है यह मामला?
किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में 'अधिकारी' जनता और संस्थाओं के सेवक होते हैं, मालिक नहीं। एक तकनीकी सहायक का प्राथमिक शाला जैसे संवेदनशील स्थान पर जाकर शिक्षकों और बच्चों को प्रताड़ित करना 'पावर के दुरुपयोग' का उत्कृष्ट उदाहरण है। यदि प्रशासन ऐसे कृत्यों पर चुप्पी साधता है, तो इससे मैदानी स्तर पर काम कर रहे शिक्षकों का मनोबल गिरना निश्चित है।








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