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कुरूद की विकास क्रांति: शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान; एक ही छत के नीचे अब सब कुछ मुमकिन!

कुरूद।

छत्तीसगढ़ की राजनीति के दिग्गज और कुरूद के 'भाग्य विधाता' कहे जाने वाले विधायक श्री अजय चन्द्राकर का सपना अब धरातल पर उतर रहा है। 05 फरवरी को होने वाला नर्सिंग कॉलेज का भूमिपूजन कुरूद को 'मेडिकल एजुकेशन' के नए गढ़ के रूप में स्थापित कर देगा। यह आयोजन केवल एक इमारत की नींव नहीं, बल्कि कुरूद की आने वाली पीढ़ियों के लिए 'सस्ती और श्रेष्ठ' शिक्षा का द्वार है।

क्यों खास है यह 'नर्सिंग कॉलेज'?

पलायन के दंश को झेलने वाले इस क्षेत्र में अजय चन्द्राकर ने कृषि, विधि, और तकनीकी शिक्षा की जो दीवारें खड़ी की थीं, अब उसमें 'स्वास्थ्य' का सुनहरा गुंबद जुड़ने जा रहा है।

क्यों 'नर्सिंग कॉलेज' है मास्टरस्ट्रोक?

विधायक चन्द्राकर ने इस बार सीधे मिडिल क्लास और गरीब परिवारों की नब्ज पर हाथ रखा है।

बेटी पढ़ेगी, घर बढ़ेगा: अब कुरूद की बेटियों को नर्सिंग कोर्स के लिए बड़े शहरों में असुरक्षित और महंगे हॉस्टलों में नहीं रहना पड़ेगा।

आर्थिक क्रांति: इस कॉलेज के आने से क्षेत्र में बाहरी छात्रों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे स्थानीय छोटे व्यापारियों, हॉस्टल संचालकों और परिवहन क्षेत्र को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

हेल्थकेयर की मजबूती: कॉलेज के साथ ही भविष्य में क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।

मंच पर जुटेंगे दिग्गज:

इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनेंगे कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री दीपक महस्के (अध्यक्ष, छ.ग. मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन), विशिष्ट अतिथि श्री निरंजन सिन्हा (अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक), श्री गौकरन साहू (जिला पंचायत उपाध्यक्ष), और नगर की प्रथम नागरिक श्रीमती ज्योति भानु चन्द्राकर व श्रीमती गीतेश्वरी साहू।

यह आयोजन गवाह है कि जब विजन बड़ा हो, तो एक छोटा सा कस्बा भी 'नॉलेज सिटी' बन जाता है। अब कुरूद का युवा सिर्फ डिग्री नहीं लेगा, बल्कि वह 'स्किल्ड' होकर सीधे रोजगार से जुड़ेगा।


 
 
 

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