कुरूद को मिला जल-शक्ति का संबल: ₹4.29 करोड़ की परियोजना किसान की किस्मत बदलने को तैयार
- moolchand sinha

- Nov 30, 2025
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धमतरी/कुरूद।
कभी महज नदी का बहाव देखकर मौसम का अंदाज़ लगाने वाला किसान अब विज्ञान, तकनीक और सुव्यवस्थित सिंचाई प्रणाली से अपना भविष्य लिखने जा रहा है। कुरूद की धरती पर बुधवार को ऐसा मंजर था, मानो वर्षों की प्रतीक्षा आखिरकार पूरी हुई हो। महानदी मुख्य नहर पर ग्राम चरमुड़िया में बनने वाले ₹4.29 करोड़ के क्रॉस रेग्युलेटर का भूमिपूजन होते ही खेतों में सपनों की हरियाली लौटने का भरोसा नए सिरे से जन्म ले चुका है।
विधायक अजय चंद्राकर ने भूमिपूजन करते हुए इसे सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि “किसानों की नियति बदलने वाली सिंचाई क्रांति” बताया। उन्होंने कहा—
“यह परियोजना पानी नहीं, विश्वास का प्रवाह है। अब कुरूद का हर खेत अपनी जरूरत का हक पाएगा।”
पानी की हर बूँद अब खेतों तक ‘न्याय’ लेकर आएगी
सिंचाई व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या— कभी पानी ज्यादा, कभी बिल्कुल नहीं।
यही असमानता कई गांवों की फसलों के लिए सबसे बड़ा संकट बनी थी। अब महानदी मुख्य नहर के आर.डी. 28.89 किमी पर बनने वाला यह आधुनिक क्रॉस रेग्युलेटर पूरी तस्वीर बदलने वाला है। ‘साय सरकार’ द्वारा त्वरित मंजूरी पाने के बाद इस परियोजना को प्राथमिकता देकर शुरू किया गया है।
तीन बड़े बदलाव जो कुरूद की किस्मत लिखेंगे:
1. संतुलित जल-वितरण: अब हर खेत को तय समय पर उसका हिस्सा मिलेगा।
2. उन्नत जल प्रबंधन: पानी की बर्बादी रुकेगी और नहर का जलस्तर स्मार्ट तरीके से नियंत्रित होगा।
3. पेयजल व्यवस्था मजबूत: सिंचाई स्थिर होने से कई गांवों की पीने के पानी की परेशानी भी कम होगी।
किसान अब सिर्फ अन्नदाता नहीं— विकसित भारत के कर्ता-धर्ता
विधायक चंद्राकर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा—
“नई सिंचाई प्रणाली, जैविक खेती और वैज्ञानिक पद्धतियाँ कुरूद को कृषि-समृद्धि का केंद्र बनाएंगी।”
उन्होंने स्थानीय प्रगतिशील किसानों की सराहना करते हुए बताया कि आने वाले वर्षों में—
कुरूद की सिंचाई व्यवस्था राज्य का मॉडल बनेगी,
कृषि उत्पाद में गुणवत्ता और मात्रा दोनों में उछाल आएगा,
और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया इंजन मिलेगा।
क्रॉस रेग्युलेटर: साधारण नाम, असाधारण तकनीक
यह संरचना नहर का जलस्तर इस तरह नियंत्रित करती है कि मुख्य नहर में पानी कम भी हो जाए, तब भी छोटी नहरों तक निर्बाध आपूर्ति जारी रहती है। इसे पानी का हाइड्रोलिक बॉडीगार्ड कहा जा सकता है— जो नहर प्रणाली को सुरक्षित, संतुलित और नियमित रखता है।








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