धान के दाने-दाने पर 'सियासत' या 'साजिश'? किसानों के गुस्से ने बढ़ाई साय सरकार की बेचैनी
- moolchand sinha

- 5 days ago
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कुरुद |
छत्तीसगढ़ की सियासत में 'धान' सिर्फ फसल नहीं, सत्ता की चाबी है। लेकिन कुरुद की सड़कों पर आज जो मंजर दिखा, वह सरकार के लिए खतरे की घंटी है। भरदा चौक पर जब सैकड़ों किसानों के साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने हुंकार भरी, तो प्रशासन के गलियारों में खलबली मच गई। यह विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अन्नदाता के उस दर्द का सैलाब था, जो 'रकबा समर्पण' और 'टोकन की किल्लत' के रूप में रिस रहा है।
हकीकत का आईना: फाइलों में खरीदी, जमीन पर बर्बादी?
कांग्रेस की इस ललकार ने सीधे तौर पर साय सरकार के 'सुशासन' के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रदर्शन के दौरान उभर कर आई तीन कड़वी सच्चाइयां:
रकबा समर्पण की 'सर्जिकल स्ट्राइक': नीलम चंद्राकर ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि अधिकारियों को 'टारगेट' दिया गया है कि वे किसानों का रकबा कम करें, ताकि सरकार को कम धान खरीदना पड़े। यह किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।
समितियों में 'अघोषित आपातकाल': भाठागांव और बगौद समितियों के निरीक्षण में जो सच सामने आया, वह डराने वाला है। धान का उठाव न होने से समितियां 'कब्रिस्तान' बन गई हैं, जहां नया धान रखने की जगह तक नहीं है।
टोकन का 'ब्लैक होल': किसान अपनी ही फसल बेचने के लिए अपराधी की तरह कतारों में खड़ा है, लेकिन 'सर्वर डाउन' और 'कोटा खत्म' के जुमले उसे बैरंग लौटा रहे हैं।
⚡ तारिणी चंद्राकर का 'रणघोष': "हम झुकेंगे नहीं, हम रुकेंगे नहीं"
भीड़ को संबोधित करते हुए तारिणी चंद्राकर के तेवर किसी ज्वालामुखी की तरह थे। उन्होंने दो-टूक कहा:
"सरकार महलों में बैठकर डेटा चमका रही है, और हमारा किसान कड़कती ठंड में टोकन के लिए ठिठुर रहा है। भाठागांव से लेकर बगौद तक हर समिति भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का अड्डा बन चुकी है। यह ज्ञापन सिर्फ कागज नहीं, किसानों का अल्टीमेटम है—सुधर जाओ, वरना कुरुद की यह आग मंत्रालय तक पहुंचेगी।"
'चार्जशीट' के 6 बड़े बिंदु: जो हिला देंगे सत्ता की चूलें

कांग्रेस ने तहसीलदार के माध्यम से प्रशासन को जो 6 सूत्रीय अल्टीमेटम थमाया है, वह सरकार की नाकामियों का कच्चा चिट्ठा है:
दाना-दाना खरीदी: बिना किसी 'कंडीशन' के हर किसान की पूरी उपज खरीदी जाए।
अवैध कटौती पर रोक: जबरन रकबा समर्पण कराने वाले अधिकारियों पर एफआईआर हो।
समय सीमा का विस्तार: फरवरी के अंतिम सप्ताह तक खरीदी की तारीख बढ़ाई जाए।
युद्ध स्तर पर उठाव: ट्रांसपोर्टेशन की सुस्ती दूर कर समितियों को खाली किया जाए।
पारदर्शिता का युग: टोकन वितरण की सूची सार्वजनिक की जाए ताकि बंदरबांट रुके।
"सड़क से सदन तक... अब युद्ध होगा!"
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नीलम चंद्राकर ने चेतावनी दी कि चुनाव के वक्त 'महतारी' और 'किसान' के नाम पर वोट मांगने वाली भाजपा अब अपने वादों से मुकर रही है। उन्होंने साफ किया कि यदि 48 घंटों के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं दिखा, तो कांग्रेस जिले के हर मुख्य मार्ग को अवरुद्ध कर 'चक्काजाम' करेगी।
कुरुद का यह प्रदर्शन बताता है कि किसान अब चुप बैठने वाला नहीं है। तारिणी चंद्राकर की अगुवाई में कांग्रेस ने किसानों के हक की जो मशाल जलाई है, वह अब पूरे छत्तीसगढ़ की राजनीति का रुख तय करेगी।








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