गाड़ाडीह के 'रंग' और वायुसेना का 'संग': दिल्ली में धमतरी के अवध राम ने रचा इतिहास, पायलट भी हुए हुनर के कायल
- moolchand sinha

- Jan 15
- 3 min read
दिल्ली / धमतरी।
"धमतरी के गाड़ाडीह की 'मिट्टी' ने जब देश की राजधानी 'दिल्ली' में अपनी चमक बिखेरी, तो वहां मौजूद हर शख्स बस देखता ही रह गया। मौका था राष्ट्रीय युवा महोत्सव का और सामने थे आसमान का सीना चीरने वाले भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट सुधांशु शुक्ला। जब ग्रामीण परिवेश के 'मास्टर आर्टिस्ट' और रंगोली-स्केच के जादूगर अवध राम कंवर ने अपनी विजेता पेंटिंग इस जांबाज पायलट के हाथों में सौंपी, तो वह क्षण केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के हुनर की 'फ्लाइट' बन गया। पायलट की आंखों में चमक और अवध के चेहरे पर सादगी—इस एक फ्रेम ने बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह दिया।"
वह ऐतिहासिक पल: जब 'कला' ने किया 'शौर्य' को सलाम
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव (10–12 जनवरी 2026) की चकाचौंध के बीच एक तस्वीर अब सोशल मीडिया और लोगों के दिलों में बस गई है। प्रतियोगिता में अपनी जिस पेंटिंग के जरिए अवध राम ने जजों को प्रभावित किया, वही चयनित पेंटिंग उन्होंने आदरपूर्वक विंग कमांडर सुधांशु शुक्ला को भेंट की।
पायलट शुक्ला, जो 30,000 फीट की ऊंचाई पर देश की सुरक्षा करते हैं, वे जमीन पर उकेरी गई इस बारीक कलाकृति को देखकर स्तब्ध रह गए। यह भेंट केवल एक पेंटिंग नहीं थी; यह एक ग्रामीण कलाकार द्वारा भारतीय सेना के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक थी।
कौन हैं अवध राम? (पेंटिंग से रंगोली तक का जादू)
अवध राम कंवर को अगर 'कला का हरफनमौला' कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
जादुई उंगलियां: गड़ाडीह निवासी अवध केवल पेंटिंग तक सीमित नहीं हैं। चाहे पेंसिल से किसी चेहरे के भावों को स्केच करना हो, कैनवास पर ड्राइंग के जरिए कहानी कहनी हो, या फिर त्योहारों पर जमीन पर रंगोली के जरिए सतरंगी दुनिया रचनी हो—उन्हें हर विधा में महारत हासिल है।
जीवंत कलाकृतियां: उनकी बनाई कलाकृतियों में एक अजीब सी कशिश है। देखने वाला ठिठक जाता है, मानो तस्वीर अभी बोल पड़ेगी। ग्रामीण परिवेश का भोलापन और आधुनिक कला की बारीकियां उनके काम में साफ झलकती हैं।
तराशने वाले जौहरी: 'जीवन रंग' और 'बसंत फाउंडेशन'
कहा जाता है कि हीरा खदान में मिलता है, लेकिन चमकता तब है जब उसे सही जौहरी मिले। अवध की प्रतिभा को निखारने में 'जीवन रंग आर्ट क्लास' और 'बसंत फाउंडेशन, कुरूद' ने वही भूमिका निभाई है। इन संस्थाओं के माध्यम से अवध ने अपनी कच्ची कला को पक्का किया और अपनी कूची को वह धार दी, जिसने आज उन्हें दिल्ली तक पहुँचाया।
सफरनामा: सफलता की तीन सीढ़ियां
यह सफलता रातों-रात नहीं मिली। यह एक तपस्या थी जो तीन पड़ावों से गुजरी:
धमतरी (शुभारंभ): 9 दिसंबर 2025 को जिला स्तर पर जब अवध ने ब्रश उठाया, तो तय हो गया था कि यह प्रतिभा रुकने वाली नहीं है।
बिलासपुर (संघर्ष): 23 से 25 दिसंबर 2025 को न्यायधानी बिलासपुर में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता हुई। कड़ी टक्कर के बीच अवध की पेंटिंग ने अपना लोहा मनवाया और 'नेशनल' का टिकट पक्का किया।
नई दिल्ली (शिखर): 10 से 12 जनवरी 2026 को देश के दिल दिल्ली में, जहाँ भारत भर के युवा जुटे थे, वहां गड़ाडीह के इस लाल ने अपनी अमिट छाप छोड़ी।
एक प्रेरणा
अवध राम की यह उपलब्धि धमतरी और कुरूद क्षेत्र के हर उस युवा के लिए एक मिसाल है जो संसाधनों के अभाव में अपने सपने छोड़ देते हैं। अवध ने दिखाया है कि अगर आप 'जीवन रंग आर्ट क्लास' जैसी सही मार्गदर्शन और 'बसंत फाउंडेशन' जैसी संस्थाओं के साथ हों, तो गाँव की पगडंडी सीधे दिल्ली के राजपथ तक ले जा सकती है।
काम आई 'कलेक्टर' की क्लास और 'बसंत' का साथ
इस उपलब्धि के पीछे की कहानी संघर्ष और सहयोग की एक मिसाल है:
कलेक्टर का 'मोटिवेशन': जिले के संवेदनशील मुखिया और कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा ने अवध की प्रतिभा को न केवल पहचाना बल्कि उन्हें लगातार प्रेरित (Motivate) किया। कलेक्टर साहब का यह प्रोत्साहन अवध के लिए किसी 'बूस्टर डोज' से कम नहीं था, जिसने उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की ऊर्जा दी।
बसंत साहू का 'हौसला': बसंत फाउंडेशन कुरूद के संस्थापक बसंत साहू एक अभिभावक की तरह अवध के साथ खड़े रहे। उन्होंने न केवल कलाकार का उत्साहवर्धन किया बल्कि हर मुश्किल में उनकी हौसला अफजाई कर यह विश्वास दिलाया कि "तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं।"








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