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⚡ छत्तीसगढ़ का सियासी पारा हाई: राज्यसभा के लिए लेखराम साहू ने ठोंकी ताल, क्या कांग्रेस चुकाएगी 2018 का 'कर्ज'?


रायपुर।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों कड़ाके की ठंड के बीच राज्यसभा चुनाव की तपिश महसूस की जा रही है। वरिष्ठ किसान नेता और पिछड़े वर्ग का सशक्त चेहरा लेखराम साहू ने राजधानी में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से औपचारिक भेंट कर 2026 के राज्यसभा चुनाव हेतु अपनी दावेदारी पेश कर दी है। साहू की यह सक्रियता केवल एक आवेदन नहीं, बल्कि प्रदेश की डेमोग्राफी (OBC) और किसान राजनीति के आधार पर कांग्रेस की भावी रणनीति को दी गई एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

'गणितीय मजबूरी' से 'राजनीतिक हक' तक का सफर

लेखराम साहू ने नेतृत्व को पुरजोर तरीके से याद दिलाया कि साल 2018 में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का आधिकारिक प्रत्याशी बनाया था। उस समय विधानसभा में संख्या बल कम होने के कारण कांग्रेस की वह सीट हाथ से निकल गई थी। साहू ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह 'तकनीकी हार' थी, 'जनाधार की हार' नहीं। अब 2026 में जब समीकरण बदल रहे हैं, तो साहू का दावा है कि पिछड़ा वर्ग और किसानों के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता दिखाने का यह सबसे सटीक समय है।

सामाजिक रसूख: "केवल चेहरा नहीं, जनाधार का प्रतिनिधित्व"

राजधानी में दावेदारी के दौरान साहू के साथ उमड़ी ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भीड़ ने उनके 'पॉलिटिकल वेट' का अहसास करा दिया है। रणनीतिकारों का मानना है कि:

OBC कार्ड: छत्तीसगढ़ की राजनीति में साहू समाज और अन्य पिछड़ा वर्ग का वर्चस्व है। साहू को आगे कर कांग्रेस बीजेपी के 'हिंदुत्व और ओबीसी' गठजोड़ में सेंध लगा सकती है।

किसान फैक्टर: लेखराम साहू की पहचान एक जुझारू किसान नेता की रही है। धान के इस कटोरे में किसान के बेटे को दिल्ली भेजना कांग्रेस के लिए 'मास्टरस्ट्रोक' साबित हो सकता है।

विश्लेषण: संदेश या औपचारिकता?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 में रिक्त होने वाली दो सीटों में से एक पर कांग्रेस की दावेदारी संभावित है। लेखराम साहू की दावेदारी ने पार्टी के भीतर 'पुराने वफादार बनाम नए चेहरे' की बहस को भी जन्म दे दिया है। साहू का रसूख और उनका बेदाग राजनीतिक सफर उन्हें इस दौड़ में सबसे आगे खड़ा करता है।


अब देखना यह है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व 2026 के इस चुनाव को केवल एक सीट भरने की औपचारिकता मानता है या लेखराम साहू के जरिए छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े वोट बैंक को एक 'पावरफुल मैसेज' देने का काम करता है।

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