छत्तीसगढ़ की राजनीति में 'ऑफर' बम: संगीता सिन्हा के बयान से सर्द मौसम में बढ़ा सियासी तापमान, अजय चंद्राकर का तीखा पलटवार
- moolchand sinha

- Dec 17, 2025
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रायपुर, 17 दिसंबर 2025।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के गलियारों से निकली एक टिप्पणी ने प्रदेश की राजनीति में भीषण ठंड के बीच अचानक गर्मी बढ़ा दी है। कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेता अजय चंद्राकर को दिया गया एक कथित 'मुख्यमंत्री पद का ऑफर' अब सियासी चर्चा का केंद्र बन गया है। सिन्हा ने साफ शब्दों में कहा कि यदि अजय चंद्राकर 15 विधायकों के साथ कांग्रेस में आते हैं, तो पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार है।
इस बयान को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ही खेमों में अलग-अलग नजरिए से बहस छिड़ गई है, जिससे राज्य का सियासी पारा अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है।
नेता प्रतिपक्ष की भूमिका से

उपजा 'ऑफर'
कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने मीडिया से बातचीत में अपने इस सनसनीखेज बयान के पीछे तर्क दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र के पहले दिन जब कई कांग्रेस विधायक अनुपस्थित थे, तब अजय चंद्राकर ने सदन में नेता प्रतिपक्ष जैसी आक्रामक और प्रभावी भूमिका निभाई।
सिन्हा ने टिप्पणी की कि इससे यह स्पष्ट होता है कि अजय चंद्राकर मौजूदा भाजपा सरकार और पार्टी के भीतर की स्थिति से असंतुष्ट हैं। इसी कथित असंतोष को आधार बनाते हुए उन्होंने यह राजनीतिक व्यंग्य किया और कहा, "अजय चंद्राकर यदि अपने साथ 15 विधायक लेकर आते हैं, तो कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार है।"
अजय चंद्राकर का तीखा और तल्ख पलटवार
संगीता सिन्हा के इस 'ऑफर' पर भाजपा नेता अजय चंद्राकर ने तुरंत और तीखा पलटवार किया है। उन्होंने इस बयान को पूरी तरह से निराधार और गैर-गंभीर बताते हुए खारिज कर दिया।
अजय चंद्राकर ने तल्ख लहजे में मीडिया से कहा कि संगीता सिन्हा की टिप्पणी वास्तविकता से परे है और वह 'बहकी-बहकी बातें' कर रही हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक ढंग से कहा कि "संभव है ठंड के मौसम में कहीं घूमने के बाद उनके दिमाग में ओले पड़ गये हैं।" चंद्राकर ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ स्पष्ट किया कि वह भारतीय जनता पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और कांग्रेस के किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।
राजनीतिक गलियारों में गरमागरम माहौल
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है। एक ओर, कांग्रेस इस बयान को अजय चंद्राकर को घेरने की एक राजनीतिक व्यंग्य और रणनीतिक टिप्पणी बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर, भाजपा इसे कांग्रेस की गहरी हताशा का प्रतीक बता रही है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के पास अब न तो सरकार को घेरने के लिए ठोस मुद्दे बचे हैं और न ही कोई स्पष्ट राजनीतिक रणनीति। ऐसे में, वह ध्यान भटकाने और भ्रामक प्रचार करने के लिए इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रही है। यह घटना दर्शाती है कि राज्य की राजनीति में सर्द मौसम के बावजूद बयानबाजी का तापमान अपने चरम पर पहुँच चुका है।




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