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छेरछेरा पर दिव्यांगों का 'गांधीगीरी' अवतार: धमतरी की सड़कों पर गुलाब और चॉकलेट ने रोका बिना हेलमेट वालों का रास्ता

धमतरी: छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध लोक पर्व 'छेरछेरा' दान और खुशियों का प्रतीक है। लेकिन आज धमतरी की सड़कों पर दिव्यांग प्रेरणा जन कल्याण समिति ने एक ऐसा 'दान' दिया, जिसने न केवल लोगों का दिल जीत लिया, बल्कि उन्हें जीवन की कीमत भी समझा दी। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित यातायात सप्ताह के बीच, इन जांबाज दिव्यांग साथियों ने अपनी शारीरिक सीमाओं को दरकिनार कर समाज को सुरक्षा का आईना दिखाया।

​'छेरछेरा, माई कोठी के धान ल हेर हेरा' के बीच 'सुरक्षा' की गुहार

​जहाँ पूरा प्रदेश अन्न के दान में व्यस्त था, वहीं समिति के संस्थापक बसंत कुमार बिश्नोई  के नेतृत्व में दिव्यांग साथियों ने बिना हेलमेट बाइक सवारों को रोका। हाथ में गुलाब और चॉकलेट लिए जब इन साथियों ने वाहन चालकों को सुरक्षा का महत्व समझाया, तो कई लोग अपनी गलती पर शर्मिंदा नजर आए। बसंत जी ने मार्मिक संदेश देते हुए कहा— "घर पर आपका कोई इंतजार कर रहा है, आपकी एक गलती पूरे परिवार को अंधेरे में धकेल सकती है।"

​"आपका हेलमेट, उनकी सुहाग की निशानी"

​समिति की अध्यक्ष श्रीमती संतोषी बिश्नोई ने इस अभियान को एक भावुक मोड़ दिया। उन्होंने बाइक सवारों से सीधे संवाद करते हुए कहा— "जब आप हेलमेट पहनते हैं, तो आप सिर्फ अपना सिर नहीं बचाते, बल्कि अपनी पत्नी की मांग का सिंदूर और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करते हैं।" इस संदेश ने युवाओं और बुजुर्गों, दोनों पर गहरा प्रभाव डाला।

​संगठन की शक्ति और भावी रणनीति

​अभियान के बाद आयोजित मासिक बैठक में दिव्यांगों के हितों और सामाजिक सरोकारों पर चर्चा हुई। इस दौरान समिति की सचिव सुलेखा अली, उपाध्यक्ष सुलोचना साहू, सह सचिव डेराराम सहित रोहित साहू, शिवचरण साहू, सुमन साहू, मिलाप राम साहू, घनश्याम साहू, डॉ. पोषण सिंह और डाली यादव जैसे समर्पित सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

मुख्य आकर्षण:

  • अनोखी पहल: चालान नहीं, गुलाब और चॉकलेट से बदली सोच।

  • भावुक अपील: "पत्नी की मांग और बच्चों की मुस्कान के लिए पहनें हेलमेट।"

  • डबल धमाका: यातायात सप्ताह और छेरछेरा पर्व का अनूठा संगम।

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