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जब 'सत्ता' ने 'साधना' के आगे शीश झुकाया! राष्ट्रीय अवार्डी बसंत साहू के घर अचानक पहुंचे डिप्टी सीएम अरुण साव, फिर जो हुआ...

कुरूद:

अक्सर लोग सम्मान पाने के लिए सत्ता के गलियारों तक जाते हैं, लेकिन युवा महोत्सव के पावन अवसर पर कुरूद में इसके उलट एक अद्भुत नजारा दिखा। जब 'संघर्ष से उपजे संकल्प' को नमन करने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव स्वयं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दिव्यांग बसंत साहू के निवास पर पहुंचे, तो लगा मानो शासन ने साधना का सम्मान किया हो।

साधना का सम्मान, घर द्वार पर:

राष्ट्रीय सम्मान मिलने के ठीक एक माह बाद, डिप्टी सीएम का कलाकार के घर 'दस्तक' देना, बसंत साहू के संघर्षों का 'राजकीय अभिनंदन' बन गया। श्री साव ने शॉल और श्रीफल से बसंत का सम्मान करते हुए कहा कि प्रतिभाएं सुविधाओं की मोहताज नहीं होतीं, वे पत्थरों का सीना चीरकर भी अपना रास्ता बना लेती हैं।

'जीवन रंग' में घोली उम्मीद:

उपमुख्यमंत्री ने 'बसंत फाउंडेशन – जीवन रंग आर्ट क्लास' की दुनिया को करीब से देखा। वहां नन्हे और विशेष बच्चों की उंगलियों का जादू देखकर वे अभिभूत हो गए। उन्होंने माना कि यह संस्थान केवल कला नहीं सिखा रहा, बल्कि जीवन जीने का सलीका गढ़ रहा है। बच्चों की खिलखिलाहट और रंगों की दुनिया के बीच श्री साव ने आश्वस्त किया कि "इस कला यज्ञ में शासन की आहुति और सहयोग का घी कम नहीं पड़ने दिया जाएगा।" गूंजा संकल्प: "तन सीमित, मन असीम"

मुलाकात के दौरान बसंत साहू ने अपने भीतर की आग को शब्दों में पिरोया, जो वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू गया। उन्होंने कहा:

"माननीय, मेरी कला केवल प्रदर्शन की वस्तु नहीं, यह मेरे संघर्ष की कोख से जन्मा 'संकल्प' है। विधाता ने शरीर को सीमाओं में बांधा जरूर है, लेकिन मेरे सृजन और सेवा की उड़ान को रोकने वाला कोई पिंजरा नहीं बना।"


भरोसा: अब कर्म की बारी

बसंत साहू ने फाउंडेशन के संचालन और दिव्यांग कलाकारों के लिए आवश्यक संसाधनों की मांग को प्रमुखता से रखा। डिप्टी सीएम ने एक संवेदनशील अभिभावक की तरह हर मांग को सुना और त्वरित निराकरण का 'वचन' दिया।

कुरूद के लिए यह दिन ऐतिहासिक बन गया। अब बसंत साहू और 'जीवन रंग' के नन्हे कलाकारों को इंतजार है उस सुबह का, जब डिप्टी सीएम का यह आश्वासन धरातल पर साकार होगा और कला की यह लौ और अधिक प्रखर होकर जलेगी।

खबर सार:

आज युवा महोत्सव पर डिप्टी सीएम श्री अरुण साव ने कुरूद में राष्ट्रीय अवार्डी दिव्यांग बसंत साहू के घर पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया।

खास बातें:

'बसंत फाउंडेशन' के बच्चों की कलाकारी देख मुरीद हुए डिप्टी सीएम।

​संस्था की जरूरतों पर शासन की ओर से ठोस मदद का भरोसा

​बसंत साहू का दमदार संदेश: "शरीर सीमित हो सकता है, पर सृजन की उड़ान असीम है।"

​यह मुलाकात साबित करती है कि हौसलों के आगे हर बाधा बौनी है। शासन की यह संवेदनशीलता काबिले-तारीफ है!


शासन की पहल पर राय मांगने के लिए (Opinion Based)

"डिप्टी सीएम अरुण साव की इस संवेदनशील पहल और घर जाकर कलाकार को सम्मानित करने के अंदाज पर आपकी क्या राय है? क्या हर जनप्रतिनिधि को ऐसी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए? अपने विचार कमेंट में बताएं।"

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