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🏅 तिरंगे की हुंकार, कुरूद का गौरव 🇮🇳 नेपाल की धरती पर ‘गोल्ड’, कुरूद की सड़कों पर देशभक्ति का सैलाब

कुरूद (धमतरी): हिमालय की गोद (नेपाल) में तिरंगा फहराकर भारत का मस्तक गौरव से ऊँचा करने वाले अंतरराष्ट्रीय बॉल बैडमिंटन स्वर्ण पदक विजेता नरेंद्र कुमार का आज कुरूद की धरा पर कदम रखते ही जन-सैलाब उमड़ पड़ा। 01 से 05 जनवरी 2026 तक नेपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले इस वीर का स्वागत किसी महापर्व से कम नहीं था। सांधा चौक से लेकर ग्राम परखंदा की गलियों तक, हवाओं में सिर्फ देशभक्ति के तराने और 'भारत माता की जय' के नारे गूँज रहे थे।

​ सांधा चौक पर 'शाही' स्वागत: नगर पालिका अध्यक्ष का भव्य नेतृत्व

​जैसे ही स्वर्ण विजेता नरेंद्र कुमार कुरूद की सीमा में प्रविष्ट हुए, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती ज्योति भानु चंद्राकर के नेतृत्व में नगर के गणमान्य नागरिकों ने उनका 'शाही' इस्तकबाल किया। ढोल-नगाड़ों की गूँज और 'वंदे मातरम' के गगनभेदी नारों के बीच अध्यक्ष महोदया ने विशाल पुष्प मालाओं से नरेंद्र का अभिनंदन किया। चौक पर मौजूद हजारों की भीड़ ने पुष्पवर्षा कर अपने लाडले का पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत किया। यह दृश्य ऐसा था मानो पूरा कुरूद अपने गौरव को गले लगाने उमड़ पड़ा हो।

​आशीष शर्मा और टीम का जोशपूर्ण अभिनंदन

​अभिनंदन की इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष आशीष शर्मा और उनकी टीम ने भी अंतरराष्ट्रीय चैंपियन का आत्मीय स्वागत किया। आशीष शर्मा ने नरेंद्र को फूल-मालाओं से लादते हुए कहा कि यह उपलब्धि समूचे छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक मिसाल है। उनकी टीम ने उत्साहपूर्वक नारेबाजी की और नरेंद्र के अजेय सफर की सराहना करते हुए उन्हें क्षेत्र का असली 'यूथ आइकॉन' बताया।

​ ज्योति भानु चंद्राकर का ओजस्वी बात कही : "नरेंद्र की जीत, कुरूद की हुंकार है"

​स्वागत समारोह के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती ज्योति भानु चंद्राकर ने अपने ऊर्जावान संबोधन से उपस्थित जनसमूह के भीतर जोश भर दिया। उन्होंने कहा—

"आज मेरा हृदय गर्व से भरा हुआ है। नरेंद्र ने केवल बॉल बैडमिंटन का मैच नहीं जीता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर कुरूद की शक्ति और सामर्थ्य का परिचय दिया है। लोग कहते थे कि ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाओं को मंच नहीं मिलता, लेकिन नरेंद्र ने नेपाल में तिरंगा फहराकर उन सबकी सोच बदल दी। यह मेडल सिर्फ धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि नरेंद्र के कड़े परिश्रम और परखंदा की माटी के संकल्प की महाविजय है। कुरूद का हर युवा आज अपनी आँखों में नरेंद्र जैसा सपना पाले; हमारा प्रशासन खेल और खिलाड़ियों के लिए हर संभव द्वार खोलने को तैयार है। बढ़ो नरेंद्र, पूरा देश और यह नगर तुम्हारे साथ खड़ा है!"


​ विजय रथ, आतिशबाजी और 'नगर भ्रमण' का उत्सव

​बाजे-गाजे के साथ निकली यह विजय रैली जिस मार्ग से गुजरी, वहाँ उत्सव सा माहौल हो गया। पूरा नगर तोरण, वंदनवार, तिरंगे झंडों और स्वागत द्वारों से दुल्हन की तरह सजा था। आतिशबाजी की गूँज और अबीर-गुलाल के बीच रैली इन प्रमुख मार्गों से गुजरी:

डिपो रोड एवं कॉलेज रोड: यहाँ छात्र-छात्राओं और युवाओं ने हाथ में तिरंगा लेकर रैली की अगुवाई की।

भाजपा कार्यालय एवं कारगिल चौक: शहीदों को नमन करते हुए भारत माता के गगनभेदी जयकारे लगाए गए।

सार्वजनिक चौक एवं पुराना बाजार: व्यापारियों ने अपनी दुकानें छोड़कर चैंपियन पर फूलों की वर्षा की।

थाना चौक एवं गांधी चौक: यहाँ का पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।

​ परखंदा की गलियों में 'गोल्डन बॉय' का भावुक स्वागत

​नगर भ्रमण के बाद रैली उमरदा और गाड़ाडीह होते हुए नरेंद्र के गृह ग्राम परखंदा पहुँची। अपने गाँव के बेटे को अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडलिस्ट के रूप में वापस लौटते देख ग्रामीणों की आँखें खुशी से छलक आईं। गाँव की हर गली में फूलों की चादर बिछाई गई थी। घर-घर में माताओं-बहनों ने आरती उतारकर और तिलक लगाकर अपने वीर का स्वागत किया। पूरा गाँव तिरंगे झंडों से युक्त था, मानो गाँव ने स्वयं विजय का चोला पहन लिया हो।

​ सुरक्षा और व्यवस्था का पुख्ता तालमेल

​हजारों की भीड़ और उत्साह के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन और स्थानीय वालंटियर्स ने शानदार तालमेल दिखाया। सांधा चौक से लेकर परखंदा की अंतिम गली तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे, जिससे खेल प्रेमियों ने बिना किसी बाधा के इस ऐतिहासिक क्षण का आनंद लिया।

​ नरेंद्र कुमार की यह स्वर्णिम यात्रा कुरूद के खेल इतिहास में एक नए युग की शुरुआत है। यह जीत न केवल बॉल बैडमिंटन की है, बल्कि ग्रामीण अंचल के उस अटूट भरोसे की है जो कहता है— "हम भी विश्व जीत सकते हैं।"

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