फेडरेशन कप: 'यलो बॉल' की रफ़्तार और रिफ्लेक्स का इम्तिहान, दक्षिण के दुर्ग को भेदने निकलीं छत्तीसगढ़ की बेटियां
- moolchand sinha

- Jan 21
- 2 min read
अक्सर रैकेट खेलों में शटलकॉक की चर्चा होती है, लेकिन बॉल बैडमिंटन वह खेल है जो खिलाड़ी की कलाई की ताकत के साथ-साथ उसके 'स्नायुतंत्र' (Nervous System) की भी परीक्षा लेता है। 120 किमी/घंटा तक की रफ़्तार से आती गेंद को नियंत्रित करना बच्चों का खेल नहीं। इसी तकनीकी दक्षता और अदम्य साहस के साथ,

(खेल डेस्क/विशेष प्रतिनिधि)
धमतरी/रायपुर
छत्तीसगढ़ की बेटियां 9वें फेडरेशन कप बॉल बैडमिंटन चैंपियनशिप 2025-26 में हिस्सा लेने के लिए मंगलवार को रायपुर रेलवे स्टेशन से तमिलनाडु के लिए रवाना हुईं।
तिरुनेलवेली में सजेगा नजीरों का मंच
तमिलनाडु का तिरुनेलवेली शहर 24 से 26 जनवरी 2026 तक देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं का गवाह बनेगा। फेडरेशन कप को इस खेल का 'पावरहाउस इवेंट' माना जाता है, जहाँ केवल वे टीमें पहुंचती हैं जिनमें चैंपियन बनने का माद्दा होता है। छत्तीसगढ़ की टीम इस बार केवल भागीदारी के लिए नहीं, बल्कि पदक तालिका में शीर्ष स्थान पाने की रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी।
धमतरी की 'तिकड़ी' पर सबकी निगाहें: टैलेंट हब बना जिला
इस राष्ट्रीय अभियान में सबसे दिलचस्प पहलू धमतरी जिले का बढ़ता कद है। राज्य की टीम में जिले की तीन खिलाड़ियों का चयन यह साबित करता है कि यहाँ जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने का काम कितनी संजीदगी से हो रहा है।
टीम की 'रीढ़' माने जाने वाली ये तीन खिलाड़ियाँ हैं:
श्रेया सोनबेर (परखंदा) - पिता: श्री परमेश्वर सोनबर | (कोर्ट पर अपनी चपलता के लिए मशहूर)
टिकेश्वरी चंद्राकर (छाती) - पिता: श्री प्रेमशंकर चंद्राकर | (सटीक सर्विस और डिफेंस की माहिर)
युक्ता जेठावानी (धमतरी) - पिता: श्री मनीष जेठवानी | (गेम मेकिंग और आक्रामक शैली की खिलाड़ी)
कोच की 'पैनी नजर' और मैनेजर का 'कौशल'
इस बार की टीम की सबसे बड़ी ताकत उनका 'थिंक-टैंक' है। टीम की तैयारियों को अंतिम रूप देने में खेल प्रशिक्षक गोपाल साहू ने अहम भूमिका निभाई है। खिलाड़ियों के कोर्ट मूवमेंट, रिफ्लेक्स और स्ट्रोक प्ले पर प्रशिक्षक साहू ने बारीकी से काम किया है।
इन प्रतिभाओं को एकजुट कर एक टीम के रूप में पिरोने का जिम्मा टीम मैनेजर आकांक्षा जोशी (धमतरी) के पास है, जिन्होंने खिलाड़ियों को मानसिक रूप से सुदृढ़ किया है।
'पसीना बहाया है, परिणाम भी लाएंगे'
फेडरेशन कप का दबाव अलग होता है। इसे समझते हुए टीम ने रवानगी से पहले कड़े प्रशिक्षण सत्रों से खुद को गुजारा है। टीम प्रबंधन का कहना है, "हमने खिलाड़ियों के 'फुटवर्क' और 'हैंड-आई कोऑर्डिनेशन' पर विशेष काम किया है। नियमित अभ्यास के साथ विशेष कैंप ने उन्हें तकनीकी रूप से परिपक्व बना दिया है।"
स्टेशन पर दिखा विजय का विश्वास
टीम की रवानगी के वक्त रायपुर स्टेशन का माहौल उम्मीदों से भरा था। खिलाड़ियों को विदा करने और उनका हौसला बढ़ाने के लिए ग्राम प्रमुख श्रीमती माधुरी मोहित साहू, शाला विकास समिति अध्यक्ष श्रीमती तारा गिरेंद्र साहू, डॉ. चैम्पश्वर सोनकर और प्राचार्य श्री रविन्द्र कुमार साहू मौजूद रहे।
उन्होंने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए एक ही संदेश दिया— "खेल भावना को सर्वोपरि रखें, लेकिन जीत की भूख कम न होने दें। आपका अनुशासन ही आपकी जीत की गारंटी है।"
अब देखना दिलचस्प होगा कि जब 24 जनवरी को तिरुनेलवेली के कोर्ट पर सीटी बजेगी, तो छत्तीसगढ़ की ये बेटियां अपने खेल से विरोधियों को किस तरह चौंकाती हैं।








Comments