धमतरी पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप': ऑनलाइन ठगी के जाल में फंसा चॉइस सेंटर संचालक, 'म्यूल अकाउंट' के जरिए करता था काले खेल का सफेद!
- moolchand sinha

- 14 hours ago
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धमतरी | स्पेशल क्राइम डेस्क
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के एक ऐसे खतरनाक सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो 'म्यूल अकाउंट' के जरिए मासूम लोगों की गाढ़ी कमाई निगल रहा था। मगरलोड पुलिस की इस सर्जिकल स्ट्राइक ने उन लोगों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है, जो चंद रुपयों के कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता 'किराये' पर दे देते हैं।
इन्वेस्टिगेशन: 'समन्वय पोर्टल' की एक टिप और शुरू हुआ पुलिस का एक्शन
इस हाई-प्रोफाइल मामले का क्लाइमेक्स तब शुरू हुआ जब भारत सरकार के समन्वय पोर्टल (Cyber Coordination Centre) पर एक संदिग्ध ट्रांजेक्शन फ्लैश हुआ। डेटा इशारा कर रहा था कि बैंक ऑफ बड़ौदा, मेघा शाखा के एक खाते में ठगी के 24,000/- रुपये अचानक लैंड हुए हैं।
जब धमतरी पुलिस की साइबर विंग ने डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा किया, तो कड़ियाँ बेलोरा निवासी धमेंद्र कुमार साहू से जाकर जुड़ीं। आरोपी चॉइस सेंटर की आड़ में 'मनी लॉन्ड्रिंग' का छोटा लेकिन घातक खेल खेल रहा था।
वारदात का 'थ्रिलर' मोड: मदद का हाथ और धोखे का वार
घटनाक्रम किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक महिला लोन की उम्मीद में आरोपी के पास मदद मांगने पहुंची थी:
झांसा: आरोपी ने पीड़िता को धनलक्ष्मी बैंक से बेहद कम ब्याज पर लोन दिलाने का सपना दिखाया।
एक्सेस: मोबाइल सेटिंग्स चेक करने के बहाने आरोपी ने महिला का फोन लिया और शातिर तरीके से उसका Phone-Pe पासवर्ड हासिल कर लिया।
डिजिटल लूट: पासवर्ड मिलते ही आरोपी ने अपने फोन का QR कोड निकाला और पलक झपकते ही महिला के बैंक खाते से पूरी रकम अपने खाते में ट्रांसफर कर ली।
कानूनी शिकंजा: BNS की इन सख्त धाराओं में नपा आरोपी
धमतरी एसपी के कड़े रुख के बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिनमें जमानत मिलना मुश्किल है:
धारा 317(2) और 317(4): अमानत में खयानत और संदिग्ध संपत्ति का हस्तांतरण।
धारा 318(4): बेईमानी और धोखाधड़ी के जरिए संपत्ति हड़पना।
वर्तमान स्थिति: आरोपी धमेंद्र साहू को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जप्त कर लिया है, जिससे कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
क्या आप भी अनजाने में 'मनी म्यूल' बन रहे हैं?
साइबर जगत में 'म्यूल अकाउंट' (Money Mule) उन खातों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल अपराधी अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिए करते हैं। धमतरी पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि भले ही आपने अज्ञानता या लालच में खाता दिया हो, लेकिन कानून की नज़र में आप मुख्य अपराधी के बराबर ही जिम्मेदार माने जाएंगे।
धमतरी पुलिस की 'डिजिटल सेफ्टी' गाइड (इसे अभी शेयर करें)
⚠️ QR कोड का भ्रम: याद रखें, पैसा पाने (Receive) के लिए किसी भी पिन या स्कैन की जरूरत नहीं होती।
⚠️ चॉइस सेंटर अलर्ट: किसी भी सेंटर पर अपना मोबाइल देते समय स्क्रीन पर अपनी नजर गड़ाए रखें।
⚠️ आसान पैसा एक जाल है: यदि कोई आपको कमीशन का लालच देकर खाता इस्तेमाल करने को कहे, तो समझ जाइए वह जेल की टिकट है।
⚠️ तत्काल रिपोर्ट: ठगी का एहसास होते ही तुरंत 112 या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
धमतरी पुलिस की अपील: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। आपका बैंक खाता आपकी निजी संपत्ति है, इसे अपराधियों का हथियार न बनने दें।








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