धमतरी फाइल्स: एक जिले में दो 'चमत्कार'! कहीं मैदान की मिट्टी उगल रही बारूद, तो कहीं 10 दोस्तों ने 'किताबों' से हिला दिया सिस्टम... पढ़िए वीरों की भूमि की पूरी इनसाइड स्टोरी
- moolchand sinha

- Jan 18
- 3 min read
गंगरेल बांध के लिए मशहूर धमतरी अब बना 'फौजियों का हेडक्वार्टर'; हंचलपुर के 'लकी ग्राउंड' से लेकर शहर की 'ग्रुप स्टडी' तक... युवाओं ने खोज निकाला वर्दी पाने का सीक्रेट कोड)

[ब्यूरो रिपोर्ट | धमतरी]
छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला... जिसे अब तक लोग गंगरेल बांध या धान के कटोरे के लिए जानते थे, अचानक देश के नक्शे पर 'फौजियों की फैक्ट्री' बनकर उभरा है। एसएससी जीडी 2025 (SSC GD 2025) के नतीजों ने जिले की तस्वीर बदल दी है। यहाँ सफलता की आंधी चल रही है—एक तरफ हंचलपुर के मैदान में पसीना बहाकर युवा 'जवान' बन रहे हैं, तो दूसरी तरफ 10 दोस्तों का समूह 'ग्रुप स्टडी' के दम पर इतिहास रच रहा है।
पूरा जिला इस वक्त जश्न में डूबा है। यह कहानी सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि धमतरी के उस 'जज्बे' (Spirit) की है जिसने अभावों को अवसर में बदल दिया।
चमत्कार नंबर 1: हंचलपुर का 'मैदान-ए-जंग' (जहाँ 3 साल में बने 30 फौजी)
धमतरी शहर से कुछ दूर स्थित हंचलपुर, बोरझरा और कोपेडीह का इलाका अब 'मिनी आर्मी बेस' जैसा लगता है।
शराब से शहादत तक: स्थानीय लोग बताते हैं कि एक वक्त था जब कोपेडीह जैसे गांवों की पहचान 'कच्ची शराब' थी। लेकिन युवाओं ने दिशा बदली। उन्होंने नशे की जगह दौड़ को चुना।
रात्रे परिवार का गौरव: इसी इलाके के मनराखन लाल रात्रे (पूर्व पुलिसकर्मी) के घर दिवाली से पहले ही दिवाली आ गई। उनके दो सगे बेटों—रोशन रात्रे और शेषराज रात्रे—ने एक साथ वर्दी हासिल की। एक बेटा CISF में गया, दूसरा BSF में।
रिकॉर्ड: इस 'लकी ग्राउंड' ने पिछले 3 सालों में देश को 30 से ज्यादा फौजी दिए हैं। यहाँ दिवाली पर घर से पहले मैदान में दीये जलते हैं।
चमत्कार नंबर 2: 10 दोस्तों की 'मास्टरक्लास' (जिन्होंने साथ पढ़ा और साथ जीते)
धमतरी की सफलता सिर्फ शारीरिक बल तक सीमित नहीं है। जिले के 10 अन्य मेधावी छात्रों ने 'दिमाग' का लोहा मनवाया है। इन्होंने साबित किया कि अगर साथ मिलकर पढ़ा जाए, तो कोई भी किला फतह किया जा सकता है।
सहयोग की शक्ति: निरंजन साहू, समीर, त्रिलोकी और उनके साथियों ने "पियर लर्निंग" (Peer Learning) यानी एक-दूसरे को पढ़ाने का तरीका अपनाया। कोई मैथ्स का मास्टर बना, तो कोई रीजनिंग का गुरु।
परिणाम: इन 10 दोस्तों का नाम मेरिट लिस्ट में एक साथ आया। ये अब CRPF, BSF और असम राइफल्स में धमतरी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
धमतरी के 'नवरत्न': किस विभाग में किसने गाड़े झंडे?
जिले के इन युवाओं ने पैरामिलिट्री फोर्स के हर विभाग में अपनी धमक जमा दी है:
CRPF (जिगर वाले): त्रिलोकी तारम, डेकेश साहू, उत्तम यादव, शेखर ध्रुव, प्रदीप कुमार, डुमेश कुमार, हेमलाल साहू, गजेंद्र ठाकुर।
CISF (औद्योगिक सुरक्षा): पंकज बंजारे, दीपेश साहू, टिकेश्वर साहू, दीपक कुमार, खेमेंद्र कुमार, रोशन रात्रे।
BSF (सीमा के प्रहरी): सोमप्रकाश, हिमाचल माला, कु. खिलेश कुर्रे, शेषराज रात्रे, डोमेश कुमार।
SSB & AR: निरंजन साहू (SSB) और समीर (AR)।
धमतरी ने पेश किया देश के लिए 'मॉडल'
धमतरी की यह उपलब्धि बताती है कि जब 'मैदान की धूल' और 'किताबों की स्याही' मिलती है, तो इतिहास बनता है। चाहे हंचलपुर के पसीने की कहानी हो या ग्रुप स्टडी की बुद्धिमत्ता—धमतरी के युवाओं ने दिखा दिया है कि वे किसी मेट्रो सिटी के मोहताज नहीं हैं। आज धमतरी का हर नागरिक सीना चौड़ा करके कह सकता है—"हाँ, हम वीरों की भूमि से आते हैं।"







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