धमतरी: मुरुम माफिया का 'सिस्टम' को खुला चैलेंज! प्रशासन ने सील की मशीन, माफिया ने 14 घंटे बाद दूसरी JCB उतारकर फिर खोदी जमीन हुई
- moolchand sinha

- Feb 27
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धमतरी/कुरूद।
जिला धमतरी के ग्राम सिर्री में मुरुम माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें अब शासन की कार्रवाई का रत्ती भर भी खौफ नहीं रहा। यह मामला अब केवल अवैध उत्खनन का नहीं, बल्कि प्रशासन के 'इकबाल' को दी गई सीधी चुनौती का बन गया है। कल (26 फरवरी) जिस स्थल पर खनिज विभाग ने एक चैन माउंटेन JCB को अवैध उत्खनन करते पकड़कर सील किया था, आज (27 फरवरी) ठीक उसी जगह पर दूसरी मशीन उतारकर माफिया ने जमीन का सीना चीरना शुरू कर दिया।
ज्ञापन का असर या सिर्फ दिखावा?

पूरे मामले की शुरुआत 25 फरवरी को हुई, जब ग्रामीण प्रतिनिधि योगेंद्र देवांगन ने ग्रामीणों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचकर डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में ग्राम सिर्री में हो रहे अवैध उत्खनन की विस्तृत शिकायत की गई थी। शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए।
प्रशासन की 'नाक' के नीचे माफिया का 'पावर गेम'
ग्रामीण प्रतिनिधि योगेन्द्र देवांगन और ग्रामीणों की शिकायत पर 26 फरवरी को खनिज विभाग ने Latitude 20.929122, Longitude 81.735523 पर दबिश देकर JCB (PUNJD 22 BAP 3275653) को रंगे हाथों पकड़ा और सील कर दिया था। अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन माफिया ने महज 14 घंटे के भीतर प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए उसी लोकेशन पर एक और नई JCB खड़ी कर उत्खनन दोबारा शुरू कर दिया।
"यह प्रशासन के मुंह पर तमाचा है। एक मशीन सील होती है और माफिया दूसरी मशीन ले आता है। बिना बड़ी मिलीभगत के इतना दुस्साहस मुमकिन नहीं। अगर तत्काल सख्त कार्रवाई और गिरफ्तारी नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करेंगे।"
— योगेन्द्र देवांगन, ग्रामीण प्रतिनिधि
खनिज अधिकारी का 'रटा-रटाया' जवाब, माफिया के बुलंद इरादे
जब इस गंभीर मामले पर जिला खनिज अधिकारी श्री साहू से जानकारी चाही गई, तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। उन्होंने हमेशा की तरह "दिखवाते हैं" और "जांच करेंगे" जैसा रटा-रटाया बयान देकर पल्ला झाड़ लिया। सवाल यह उठता है कि जब अपर कलेक्टर और खनिज अधिकारी ने ग्रामीणों को लिखित और मौखिक आश्वासन दिया था, तो माफिया में उसका डर क्यों नहीं है?
खबर के 3 'इम्पैक्ट' पॉइंट जो खोलते हैं पोल:
दुस्साहस की पराकाष्ठा:
सीलिंग के महज 14-24 घंटे के भीतर दूसरी मशीन का पहुंचना बताता है कि माफिया को सिस्टम का कोई डर नहीं है।
लोकेशन वही, तरीका नया:
प्रशासन की सील को दरकिनार कर उसी जगह पर दोबारा खुदाई करना कानून का सरेआम मजाक है।
पर्यावरण और सड़कों की तबाही:
अवैध उत्खनन से न केवल राजस्व की चोरी हो रही है, बल्कि गांव की सड़कें और पर्यावरण भी बर्बाद हो रहा है।
क्या अब चलेगा प्रशासन का 'हंटर'?
ग्रामीणों ने शासन प्रशासन डिप्टी कलेक्टर धमतरी और बीरेझर चौकी तक को इस नई गतिविधि की सूचना दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी नाक के नीचे हो रही इस माफियागिरी पर 'एक्शन' मोड में आता है या माफिया की यह 'दूसरी मशीन' भी प्रशासन की साख को यूं ही रौंदती रहेगी।




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