top of page

धमतरी में 'सिस्टम' की बलि चढ़ी सहकारिता: Dhamtari Paddy Shortage Loss ने फूंके 11.5 करोड़, समितियों पर संकट


 "Tarini Chandrakar protesting against Dhamtari Paddy Shortage Loss" या हिंदी में "धान उठाव में देरी और नुकसान पर तारिणी चंद्राकर का बयान"।

धमतरी।

छत्तीसगढ़ के 'धान के कटोरे' में प्रशासनिक लापरवाही की ऐसी धूप खिली है कि करोड़ों का धान हवा में उड़ गया। Dhamtari Paddy Shortage Loss का मुद्दा अब सरकार के 'सुशासन' के दावों के लिए चुनौती बन गया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष तारिणी नीलम चंद्राकर ने कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि सरकारी सुस्ती ने धमतरी की 74 समितियों को दिवालिया होने की कगार पर खड़ा कर दिया है।

35,000 क्विंटल की 'सूखत': Dhamtari Paddy Shortage Loss ने बढ़ाई समितियों की मुश्किलें

धमतरी जिले में धान खरीदी के बाद उठाव की प्रक्रिया में जो देरी हुई, उसने एक बड़े आर्थिक संकट को जन्म दिया है। Dhamtari Paddy Shortage Loss के प्रमुख कारण और प्रभाव इस प्रकार हैं:

नियमों की अनदेखी: सरकार का नियम 72 घंटे में उठाव का है, लेकिन हफ्तों तक धान केंद्रों पर पड़ा रहा।

सूखत का गणित: समय पर उठाव न होने से 35 हजार क्विंटल धान सूख गया।

आर्थिक प्रहार: इस सूखत ने समितियों को सीधे साढ़े 11 करोड़ रुपये की चपत लगाई है।

'Zero Shortage' का मायाजाल: प्रशासन की सांठगांठ पर बड़ा खुलासा

तारिणी चंद्राकर ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन अब अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए आंकड़ों की बाजीगरी कर रहा है।

प्रोत्साहन राशि पर 'डाका' डालने का षड्यंत्र

समितियों को शून्य शार्टेज पर 2 से 4 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती है। चंद्राकर के अनुसार, प्रशासन अब 'जीरो शार्टेज' दिखाने का दबाव बना रहा है ताकि यह राशि डकारी जा सके, जबकि धरातल पर धान सूख चुका है। यह Cooperative Societies के अस्तित्व को खत्म करने की सोची-समझी साजिश है।

किसानों के बाद अब समितियों के शोषण की बारी

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि जिस सरकार ने किसानों को धान बेचने के लिए रुलाया, वही अब 'अन्नदाता' के संरक्षकों यानी समितियों को तबाह कर रही है। Dhamtari Paddy Shortage Loss केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की विफलता का स्मारक है।

आखिर कौन भरेगा इस भारी नुकसान का हर्जाना?

धमतरी में 'सिस्टम' की बलि चढ़ी सहकारिता—यह खबर अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय है। जब उठाव की जिम्मेदारी शासन और परिवहन विभाग की थी, तो साढ़े 11 करोड़ का दंड समितियों को क्यों दिया जा रहा है?

"प्रशासनिक लापरवाही से समितियां कर्ज में डूब रही हैं। अगर जल्द ही इस भारी क्षति की भरपाई नहीं की गई, तो धमतरी का सहकारी ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा।"

तारिणी नीलम चंद्राकर, जिलाध्यक्ष कांग्रेस

"धमतरी का सहकारी ढांचा Dhamtari Paddy Shortage Loss के कारण पूरी तरह ध्वस्त होने की कगार पर है।

Comments


bottom of page