'धान का कटोरा' अब उगल रहा है विदेशी 'लाल सोना': धमतरी के किसान साहिल बैस ने ड्रैगन फ्रूट से रचा नया इतिहास
- moolchand sinha

- Dec 18, 2025
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धमतरी, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ को पूरे देश में 'धान का कटोरा' के रूप में जाना जाता है, लेकिन अब यहाँ की माटी अपनी परंपरा को विस्तार देते हुए नए प्रयोगों के लिए तैयार है। धमतरी जिले के ग्राम बगौद के एक प्रगतिशील किसान साहिल बैस ने अपनी दो एकड़ की भूमि पर 'ड्रैगन फ्रूट' की सफल खेती कर यह साबित कर दिया है कि धान के इस गढ़ में अब आधुनिक बागवानी की फसलें भी लहलहा सकती हैं। यह नवाचार जिले में पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
धान के बीच नवाचार की बयार
धमतरी जिला अपनी सिंचाई सुविधाओं और धान की खेती के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन पानी के गिरते स्तर और बाजार की बदलती मांग को देखते हुए साहिल बैस ने एक साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने अपनी जमीन पर आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए ड्रैगन फ्रूट के पौधे रोपे। यह विदेशी फल अब न केवल धमतरी की आबोहवा में रच-बस गया है, बल्कि किसानों के लिए 'लाल सोना' बनकर उभर रहा है।
जल संरक्षण: कम पानी में समृद्ध उत्पादन

साहिल बैस की खेती का मुख्य स्तंभ जल संरक्षण है। उन्होंने पूरे खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली (टपक पद्धति) अपनाई है। जहाँ धान की खेती में अत्यधिक पानी की खपत होती है, वहीं ड्रैगन फ्रूट का यह मॉडल 'न्यूनतम जल, अधिकतम लाभ' का जीवंत उदाहरण पेश कर रहा है। कम पानी में भी उच्च गुणवत्ता वाले फल प्राप्त कर उन्होंने सिंचाई की एक नई परिभाषा लिखी है।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने किया उत्साहवर्धन
किसान के इस अभिनव प्रयास की गूँज जिला प्रशासन तक भी पहुँची। बीते दिनों कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने व्यक्तिगत रूप से साहिल बैस के फार्म का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने खेत की मेढ़ों पर लगे ड्रैगन फ्रूट और ड्रिप सिस्टम की सराहना करते हुए कहा कि "धान के कटोरे में इस तरह के प्रयोग सराहनीय हैं। यह न केवल जल संरक्षण में सहायक है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करने का सशक्त माध्यम भी है।" उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी इस प्रेरणादायक मॉडल को देखने और अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
आय का नया जरिया और उभरता बाजार
ड्रैगन फ्रूट आज अपनी पौष्टिकता के कारण शहरी बाजारों में अत्यधिक मांग में है। साहिल बैस की इस पहल से:
बाजार का विस्तार: धमतरी और रायपुर जैसे बड़े बाजारों में सीधे आपूर्ति की संभावना।
आर्थिक मजबूती: धान के मुकाबले कम मेहनत और कम पानी में अधिक मुनाफे की गुंजाइश।
प्रेरणा पुंज: जिले के युवाओं के लिए कृषि को व्यवसाय के रूप में देखने का नया नजरिया।
आधुनिक खेती का नया पथ
बगौद के किसान साहिल बैस ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि आधुनिक तकनीक, बाजार की समझ और अटूट इच्छाशक्ति के संगम से 'धान का कटोरा' अब फल-फूलों की मिठास और मुनाफे की नई सुगंध से भी महक सकता है।
संपादकीय टिप्पणी: यह पहल धमतरी जिले को 'फसल विविधीकरण' के मानचित्र पर एक नई पहचान दिला रही है।








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