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पकड़े गए तो ‘शर्म’ नहीं, ‘मुस्कान’ दिखाई: कुरूद में अवैध धान जब्त होने पर कोचियाओं की बेशर्मी देख अधिकारी भी दंग!


धमतरी |

जब जिला प्रशासन किसानों के हक की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर बिचौलियों के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ रहा है, तब कुरूद से आई एक तस्वीर ने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर उड़नदस्ता दल ने 56.40 क्विंटल अवैध धान जब्त किया—लेकिन कार्रवाई से ज्यादा चर्चा उन चेहरों की रही, जो पकड़े जाने के बाद पछतावे की जगह मुस्कान बिखेरते दिखे। यह ढिठाई न केवल कानून का मखौल है, बल्कि उन किसानों का भी अपमान, जो दिन-रात मेहनत कर अपनी फसल उगाते हैं।

कलेक्टर का हंटर, लेकिन बिचौलियों की बेखौफी!

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने साफ संदेश दिया है—एक भी दाना अवैध तरीके से नहीं खपने दिया जाएगा। राजस्व, कृषि, खाद्य और मंडी विभाग की संयुक्त टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी की, मगर कुरूद और नगरी में दिखा नजारा चौंकाने वाला था—कार्रवाई के बीच कोचियों की बेपरवाह मुस्कान।

जब्ती का पूरा ब्यौरा: कहां-कहां पड़ी दबिश?

कुरूद मंडी क्षेत्र

श्रेयांश केला — 20.00 क्विंटल

चंदुलाल चंद्राकर — 12.80 क्विंटल

नगरी मंडी क्षेत्र

पीलूराम, ग्राम कसपुर — 11.20 क्विंटल

उत्तम कुमार, ग्राम राजपुर — 12.40 क्विंटल

कुल जब्ती: 56.40 क्विंटल अवैध धान

आक्रोश: कानून का डर या व्यवस्था का मज़ाक?

कार्रवाई के दौरान मुस्कुराते चेहरे देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। यह मुस्कान उन हजारों किसानों के आत्मसम्मान पर चोट है, जो धूप-बारिश में पसीना बहाकर फसल तैयार करते हैं। सवाल उठता है—क्या चंद क्विंटल की जब्ती से इन बिचौलियों के हौसले टूटेंगे, या कड़ी दंडात्मक कार्रवाई ही एकमात्र रास्ता है?

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। आमजन की मांग साफ है—आर्थिक अपराधियों पर जेल जैसी सख्त कार्रवाई हो, तभी यह ‘बेशर्म हंसी’ थमेगी।

प्रशासन की अगली रणनीति

जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अब केवल जब्ती नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की कुंडली खंगाली जाएगी। संदिग्धों पर सतत निगरानी के लिए उड़नदस्ता दल को और सक्रिय किया गया है, ताकि किसानों के हितों से कोई समझौता न हो।

बड़ी बात: अपराध पकड़े जाने पर चेहरे की मुस्कान—पछतावा नहीं, बल्कि ढिठाई का प्रतीक है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इन ‘मुस्कुराते चेहरों’ पर कानून का शिकंजा कितनी मजबूती से कसता है।

 
 
 

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