पर्यावरण के रक्षक बनें किसान: पराली न जलाएं, गौशाला को दान करें या कंपोस्ट खाद बनाएं - कृषक बसंत कुमार सिन्हा की भावुक अपील
- moolchand sinha

- Dec 14, 2025
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कुरूद –
बदलते जलवायु और बिगड़ते पर्यावरण के बीच, किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है। स्थानीय प्रगतिशील कृषक श्री बसंत कुमार सिन्हा ने समस्त किसान भाइयों से हृदय से अपील की है कि वे अपनी फसलों के अवशेष यानी पराली को जलाना पूर्णतः बंद कर दें। उन्होंने इस प्रथा को तत्काल रोकने का सादर अनुरोध किया है, ताकि हम सब मिलकर न केवल हवा को शुद्ध रख सकें, बल्कि खेती की मिट्टी को भी नया जीवन दे सकें। यह अपील पर्यावरण संरक्षण और गोवंश सेवा दोनों की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
पर्यावरण की रक्षा सर्वोपरि
श्री सिन्हा ने अपनी अपील में पर्यावरणीय खतरों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से उत्पन्न होने वाला धुआँ हमारे वायुमंडल में कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसों का उत्सर्जन करता है, जो न सिर्फ शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ाता है, बल्कि खेतों के आस-पास रहने वाले लोगों और बच्चों के स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया, "हम अन्नदाता हैं, लेकिन हमारा कर्तव्य केवल अन्न उगाना नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा करना भी है। पराली जलाने से हमारी ही जमीन की ऊपरी परत में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव (माइक्रोब्स) नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता खत्म होती जाती है।"
पराली का सदुपयोग: दो शानदार विकल्प
बसंत कुमार सिन्हा ने किसानों को पराली नष्ट करने के बजाय, उसके प्रभावी और लाभकारी सदुपयोग के लिए दो सरल उपाय सुझाए हैं:
गौशाला में 'पैरा दान':
उन्होंने किसान भाइयों से अनुरोध किया कि वे अपनी पराली का उपयोग गौशालाओं में 'पैरा दान' के रूप में करें। यह पराली गोवंश के लिए एक महत्वपूर्ण चारा बन सकती है। यह न केवल गोवंश के संरक्षण में एक बड़ा योगदान होगा, बल्कि किसानों को भी आत्मिक संतोष देगा।
कंपोस्ट खाद बनाना: मिट्टी का 'लाजवाब' भोजन
श्री सिन्हा का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण सुझाव पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उसे कंपोस्ट खाद बनाने में इस्तेमाल करना है। उन्होंने विस्तार से बताया कि पराली के इन टुकड़ों को अन्य जैविक पदार्थों के साथ मिलाकर 'कंपोस्टिंग' की प्रक्रिया से गुज़ारा जाए।
उन्होंने कहा, "कंपोस्ट खाद बनाकर हम अपनी मिट्टी को एक 'लाजवाब' और संतुलित भोजन देते हैं। यह कंपोस्ट खाद मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढ़ाती है, पोषक तत्वों की कमी पूरी करती है और रासायनिक खादों पर हमारी निर्भरता को कम करती है, जिससे किसानों का खर्च भी घटता है।"
कृषक सिन्हा का आह्वान
बसंत कुमार सिन्हा ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समय है जब हम पिछली गलतियों को सुधारें और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ मिट्टी और स्वच्छ हवा छोड़कर जाएं। उन्होंने सभी किसान संगठनों और ग्राम समितियों से अनुरोध किया कि वे इस संदेश को हर किसान तक पहुंचाएं और पराली प्रबंधन के इन सकारात्मक तरीकों को अपनाकर एक नई मिसाल कायम करें।
कृषक बसंत कुमार सिन्हा की अपील किसानों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का एक सशक्त प्रयास है। पराली को जलाने के बजाय गौशालाओं में दान करने या उसे उच्च गुणवत्ता वाली कंपोस्ट खाद में बदलने का उनका सुझाव, टिकाऊ और लाभदायक कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल प्रदूषण रोकने, गोवंश की सेवा करने और मिट्टी की सेहत सुधारने—तीनों लक्ष्यों को एक साथ साधती है।




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