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​पावर हब में 'पावर स्ट्रगल': वादों की आंच में सुलग रहे छत्तीसगढ़ के बिजली कर्मचारी, अब आंदोलन की 'वोल्टेज' हाई

कुरूद/रायपुर।

जिसे देश का 'पावर हब' कहा जाता है, वहां की बिजली व्यवस्था को संभालने वाले हाथों ने अब विरोध की मशाल थाम ली है। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ ने प्रबंधन के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन वादों के खिलाफ 'रणभेरी' है जो फाइलों में दबकर दम तोड़ रहे हैं।

'वर्क टू रूल': नियम की राह से विरोध का प्रहार

​वर्तमान में प्रदेश के बिजली दफ्तरों का नजारा बदला हुआ है। रायपुर ग्रामीण क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष हेमेंद्र बंजारे और सचिव पीयूष कुमार सिन्हा के नेतृत्व में कर्मचारी "वर्क टू रूल" (नियम के तहत कार्य) कर रहे हैं। इसका सीधा मतलब है—न एक मिनट ज्यादा काम, न तय मानकों से बाहर का श्रम।

यह विरोध की एक ऐसी खामोश लेकिन असरदार तकनीक है, जो बिना काम रोके सिस्टम की रफ्तार को धीमा कर प्रबंधन पर दबाव बनाती है। कर्मचारियों का संदेश साफ है: "अगर आप वादों के नियम भूलेंगे, तो हम काम के नियम याद दिलाएंगे।"


वो 5 चिंगारियां, जिन्होंने आंदोलन को भड़काया

​कर्मचारियों के इस सामूहिक आक्रोश के पीछे वर्षों की अनदेखी और ताजा वादाखिलाफी के पांच प्रमुख कारण हैं:

पेंशन का अधिकार: 2004 के बाद नियुक्त हजारों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग।

छीन ली गई रियायतें: वर्षों से बिजली कर्मियों को मिलने वाली बिजली बिल की छूट (फ्रिंज बेनिफिट) को बंद करने से उपजा गहरा असंतोष।

संविदा कर्मियों की पुकार: अल्प मानदेय पर दिन-रात खटने वाले संविदा कर्मचारियों की सैलरी में सम्मानजनक वृद्धि का न होना।

लिखित सहमति की अवमानना: द्विपक्षीय बैठकों में जिन मुद्दों पर प्रबंधन ने हस्ताक्षर किए, उन्हें लागू करने में 'उदासीनता' का परिचय देना।

अड़ियल रवैया: 15 दिसंबर को दिए गए अल्टीमेटम के बावजूद प्रबंधन द्वारा संवाद की पहल न करना।

चेतावनी की डेडलाइन: 11 फरवरी का 'काउंटडाउन'

​कर्मचारी संघ ने अपनी रणनीति के पत्ते खोल दिए हैं। 1 जनवरी से शुरू हुआ यह 'सत्याग्रह' 11 जनवरी तक इसी तरह चलेगा। लेकिन यह केवल 'ट्रेलर' है। महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल ठोस आदेश जारी नहीं किए गए, तो 11 फरवरी से पूरे छत्तीसगढ़ में "अनिश्चितकालीन काम बंद" आंदोलन शुरू होगा।

अंधेरे की ओर बढ़ता प्रदेश?

अगर यह हड़ताल होती है, तो प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। फॉल्ट सुधारने से लेकर बिलिंग तक का पहिया थम जाएगा। कर्मचारियों का तर्क है कि इस 'ब्लैकआउट' जैसी स्थिति की संपूर्ण नैतिक और प्रशासनिक जवाबदारी केवल विद्युत कंपनी प्रबंधन की होगी।

मैदान में डटे नेता

​रायपुर ग्रामीण क्षेत्र में आंदोलन की कमान संभाल रहे हेमेंद्र बंजारे का कहना है कि प्रबंधन ने बार-बार भरोसे को तोड़ा है। अब हम आश्वासनों की चाशनी नहीं, बल्कि हक का आदेश चाहते हैं। पीयूष कुमार सिन्हा ने जोर देते हुए कहा कि कर्मचारी अब पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

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