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हौसलों की उड़ान: दिव्यांगता को चुनौती दे रहे बसंत साहू, कलेक्टर ने कहा- "आप समाज के असली नायक हैं"


धमतरी/ kurud।

अक्सर लोग परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं, लेकिन कुरूद के बसंत साहू ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो शारीरिक कमियां कभी बेड़ियाँ नहीं बनतीं। विश्व कला दिवस के पावन अवसर पर जब बसंत साहू ने जिला कलेक्टर से मुलाकात की, तो वहां मौजूद हर शख्स उनकी जिजीविषा और कला के प्रति समर्पण देख दंग रह गया।

"दिव्यांगता शरीर में होती है, प्रतिभा में नहीं" — बसंत साहू

बसंत फाउंडेशन, छत्तीसगढ़ (कुरूद) के माध्यम से सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवार रहे बसंत साहू ने कलेक्टर महोदय को अपनी एक अनूठी पेंटिंग भेंट की। इस दौरान उन्होंने जो बात कही, उसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था का उद्देश्य केवल कला सिखाना नहीं, बल्कि हर उस बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाना है जो खुद को दूसरों से कमतर समझता है।

ॐ धनंजय साहू आर्ट क्लास का सशक्त साथ

इस मुहिम में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे शिक्षक श्री अवधराम कंवर जी ने बताया कि बसंत जी का जीवन अपने आप में एक कला है। वह बच्चों को न केवल रंगों का इस्तेमाल सिखाते हैं, बल्कि जीवन की मुश्किलों से लड़ना भी सिखाते हैं।

कलेक्टर की भावुक प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन

माननीय कलेक्टर महोदय ने बसंत साहू के कार्यों को 'असाधारण' बताते हुए कहा कि समाज को ऐसे ही कर्मयोगियों की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बसंत फाउंडेशन द्वारा संचालित गतिविधियाँ धमतरी जिले के लिए गौरव का विषय हैं। कलेक्टर ने भविष्य में फाउंडेशन के हर रचनात्मक कार्य में सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया।

आत्मनिर्भरता का एक नया मॉडल

आज बसंत साहू के नेतृत्व में कई युवा न केवल चित्रकारी सीख रहे हैं, बल्कि इसे अपने आर्थिक स्वावलंबन का जरिया भी बना रहे हैं। यह कहानी उन सभी के लिए एक सबक है जो छोटी-मोटी बाधाओं से हार मान लेते हैं।

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