पसीने की ताकत से नशे पर प्रहार: मौरीकला का ‘जय बजरंग अखाड़ा’ बना युवा परिवर्तन का मॉडल
- moolchand sinha

- Apr 15
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कुरूद/ kurud।
"जहाँ सुबह की पहली किरण नशे के अंधेरे को नहीं, बल्कि पसीने की चमक को चूमती है! यह कहानी है धमतरी के मौरीकला गजहाँ 'जय बजरंग अखाड़ा' ने नशे के खिलाफ एक ऐसा युद्ध छेड़ा है, जिसकी गूँज अब पूरे क्षेत्र में सुनाई दे रही है। पसीने की बूंदों से नशे के साम्राज्य पर प्रहार करते हुए, यह अखाड़ा आज छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए अनुशासन और राष्ट्रसेवा का नया 'पावर हाउस' बन चुका है।"
नशे के विरुद्ध सकारात्मक पहल, युवाओं को मिल रही नई दिशा
ग्रामीण अंचलों में नशे के दुष्प्रभावों को देखते हुए स्थानीय युवाओं द्वारा शुरू किया गया यह अखाड़ा आज दर्जनों युवाओं के जीवन में परिवर्तन ला रहा है। प्रतिदिन सुबह लगभग 5:30 बजे से अखाड़े में युवाओं को दौड़, शारीरिक प्रशिक्षण एवं भर्ती संबंधी अभ्यास कराया जाता है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर कर उन्हें सेना, पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों में भर्ती के लिए तैयार करना है।
निःशुल्क प्रशिक्षण और अनुभवी मार्गदर्शन बना सफलता का आधार
‘जय बजरंग अखाड़ा’ की सबसे बड़ी विशेषता इसका निःशुल्क प्रशिक्षण और अनुभवी मार्गदर्शन है।
अखाड़े के अध्यक्ष कमलेश कुमार साहू (विष्णु राम साहू), जिनका चयन ITBP में हुआ है, स्वयं युवाओं को मार्गदर्शन दे रहे हैं। वहीं दुमेश्वरी निषाद का छत्तीसगढ़ पुलिस में चयन इस पहल की सफलता को दर्शाता है, जो क्षेत्र की युवतियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।
सफलता की प्रेरक कहानियां बनीं युवाओं का संबल
अखाड़े से जुड़े युवाओं की उपलब्धियां यह साबित कर रही हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत इच्छाशक्ति से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यहां से चयनित युवा अन्य युवाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
पूर्व सैनिकों के मार्गदर्शन में तैयार हो रही नई पीढ़ी
अखाड़े में पूर्व सैनिक उत्तम प्रकाश द्वारा अनुशासनात्मक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही CRPF जवान पुष्पसेन निषाद एवं अग्निवीर नवीन कुमार नागरची भी समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
यहाँ केवल शारीरिक दक्षता ही नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्रभावना का भी विकास किया जा रहा है।
संस्कार और सेवा का केंद्र बनता जा रहा अखाड़ा
मौरीकला (गुफा आश्रम) में संचालित यह प्रशिक्षण केंद्र अब केवल एक अभ्यास स्थल न रहकर एक संस्कारशाला के रूप में विकसित हो रहा है।
स्थानीय संरक्षकों का उद्देश्य है कि गांव के अधिक से अधिक युवा इस पहल से जुड़कर अपने भविष्य को सुरक्षित बनाएं और देश सेवा में योगदान दें।
क्षेत्र के लिए बन रहा प्रेरणादायक मॉडल
‘जय बजरंग अखाड़ा’ की इस पहल को क्षेत्र में सराहना मिल रही है। यह मॉडल दर्शाता है कि यदि सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी नशे जैसी समस्याओं से दूर रहकर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।




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