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भागवत कथा के जादूगर आचार्य युवराज पांडे पर 'सातवीं बार जानलेवा हमला'? तेज रफ्तार ट्रक ने उड़ाई कार, बाल-बाल बचे कथावाचक!



गरियाबंद, छत्तीसगढ़।

​अपनी ओजस्वी और मधुर वाणी से लाखों लोगों को भक्ति के रंग में रंगने वाले छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय कथावाचक आचार्य युवराज पांडे एक बार फिर दैवीय चमत्कार से मौत के मुंह से सकुशल लौट आए हैं। 13 दिसंबर को गरियाबंद जिले के कुम्हारपारा इलाके में एक बेहद संदेहास्पद सड़क हादसे में उनकी कार को एक तेज रफ्तार ट्रक ने इतनी भीषण टक्कर मारी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि, इस विनाशकारी टक्कर में आचार्य जी को खरोंच तक नहीं आई।

​सनसनीखेज दावा: "यह सातवीं सुनियोजित साजिश है"

​यह घटना तब हुई जब आचार्य युवराज पांडे साखरा (बसना) में अपना सफल कथा कार्यक्रम संपन्न कर अपने पैतृक गांव अमलीपदर लौट रहे थे। दुर्घटनास्थल पर उनकी कार का पिछला हिस्सा पूरी तरह से पिचका हुआ मिला, जो हादसे की भयावहता बता रहा था।

​मगर, इस सामान्य दिख रहे हादसे ने तब एक गंभीर मोड़ ले लिया, जब स्वयं आचार्य युवराज पांडे ने इसे एक दुर्घटना मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि यह उनकी जान लेने की सातवीं सुनियोजित साजिश है।

​आचार्य जी ने मीडिया को बताया, "यह सामान्य दुर्घटना नहीं, सुनियोजित साजिश लगती है। पहले भी कई बार मेरे साथ ऐसा हो चुका है, जिसके बारे में मैंने प्रशासन को शिकायत दी थी। आखिर कौन है जो बार-बार मेरी जान का दुश्मन बना हुआ है और मुझे कथा सुनाने से रोकना चाहता है?"

​जनता में आक्रोश, सुरक्षा की मांग

​आचार्य पांडे के इस खुलासे के बाद स्थानीय भक्तों और श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया है। लोग हक्के-बक्के हैं और सवाल उठा रहे हैं कि आखिर भगवान की कथा सुनाने वाले एक संत को इतने जानलेवा हमलों का शिकार क्यों होना पड़ रहा है। स्थानीय लोग अब इस मामले की गहराई से जांच करने और आचार्य युवराज पांडे को तत्काल प्रभाव से सुरक्षा मुहैया कराने की मांग कर रहे हैं।

​फिलहाल, पुलिस ने दुर्घटना को अंजाम देने वाले ट्रक ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है और मामले की जांच जारी है। भक्तों ने सोशल मीडिया पर आचार्य जी के सकुशल होने पर खुशी और राहत व्यक्त की है।

​यह रहस्य अभी अनसुलझा है कि कथावाचक के पीछे कौन पड़ा है, लेकिन एक बात निश्चित है— आचार्य जी की अटूट भक्ति और उन पर भगवान की कृपा ने उन्हें एक और बड़ी विपदा से बचा लिया है।

 
 
 

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