top of page

"मौत के आंकड़ों को चुनौती: धमतरी पुलिस का 'मिशन जीरो एक्सीडेंट', बच्चों ने भी थामा नशामुक्ति का दामन।"

विशेष रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क

धमतरी। "सड़कें लहूलुहान न हों और किसी घर का चिराग असमय न बुझे"—इसी एक संवेदनशील संकल्प के साथ धमतरी पुलिस ने 'राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह-2026' को महज एक सरकारी औपचारिकता से ऊपर उठाकर एक 'जन-आंदोलन' में तब्दील कर दिया है। अभियान के दूसरे दिन धमतरी की फिजाओं में सिर्फ सायरन की आवाज नहीं थी, बल्कि अपनों की सलामती की एक गूंज थी।

कड़वी हकीकत: मौत का आंकड़ा और हेलमेट की बेरुखी

​धमतरी जिले के दुर्घटना आंकड़ों का विश्लेषण रोंगटे खड़े कर देने वाला है। आंकड़ों की स्याही गवाही दे रही है कि जिले में होने वाली 50% से अधिक एक्सीडेंटल मौतें केवल इसलिए हुईं क्योंकि बाइक सवारों ने हेलमेट को 'बोझ' समझा। बिना हेलमेट के सफर करने वाले युवाओं की जान की कीमत अक्सर उनके परिवारों को ताउम्र के आंसुओं से चुकानी पड़ती है। इसी खौफनाक हकीकत को बदलने के लिए धमतरी पुलिस ने इस बार 'मिशन जीरो एक्सीडेंट' का बिगुल फूंका है।

मैदान में उतरे कप्तान: 'लीड बाय एग्जांपल'

​शुक्रवार सुबह गांधी मैदान का नजारा ऐतिहासिक था। आमतौर पर सख्त नजर आने वाली खाकी आज एक अभिभावक की भूमिका में थी। जब पुलिस कप्तान श्री सूरज सिंह परिहार ने स्वयं हेलमेट पहनकर अपनी बाइक स्टार्ट की और रैली की कमान संभाली, तो पूरे शहर को एक कड़ा संदेश मिला—"नियम पद देखकर नहीं, जान देखकर बनाए गए हैं।"

​एसपी श्री परिहार ने जनसमूह को संबोधित करते हुए एक मर्मस्पर्शी बात कही: "अक्सर चालक तो बच जाता है, लेकिन पीछे बैठने वाला (पिलियन राइडर) सिर में चोट लगने के कारण दम तोड़ देता है। याद रखिए, पीछे बैठा व्यक्ति आपके परिवार का हिस्सा है, उसे असुरक्षित न छोड़ें।"

नन्हे फरिश्तों की मार्मिक अपील

​रैली की सबसे प्रभावशाली कड़ी वे स्कूली बच्चे थे, जिन्होंने कड़कड़ाती धूप की परवाह किए बिना हाथों में तख्तियां थाम रखी थीं। इन तख्तियों पर लिखे स्लोगन—'पापा जल्दी घर आना', 'नशा नाश की जड़ है' और 'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी'—ने राहगीरों की रूह को झकझोर दिया। इन नन्हे फरिश्तों की मासूम अपील ने वह काम कर दिखाया जो भारी-भरकम जुर्माने नहीं कर पाते। लोगों ने सड़क किनारे रुककर इन बच्चों का उत्साहवर्धन किया और नियमों के पालन की शपथ ली।

सफलता का रिपोर्ट कार्ड: आंकड़ों में दिख रहा है बदलाव

​यह अभियान सिर्फ बातों तक सीमित नहीं है। धमतरी पुलिस की सक्रियता का ही परिणाम है कि वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में 19% की भारी गिरावट और मौतों के मामलों में 6.21% की कमी दर्ज की गई है। हाल ही में 31 दिसंबर और नववर्ष के दौरान नशे में धुत वाहन चालकों के खिलाफ की गई 'जीरो टॉलरेंस' कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

पूरे माह चलेगा 'सुरक्षा का पहरा'

​यातायात विभाग ने पूरे महीने का खाका तैयार किया है। इसमें केवल चालानी कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि:

  • ​स्कूलों और कॉलेजों में 'लाइव डेमो' कार्यशालाएं।

  • ​वाहन चालकों के लिए निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर।

  • ​नशामुक्ति के प्रति नुक्कड़ नाटक और परामर्श सत्र।

  • ​प्रमुख चौक-चौराहों पर 'सड़क सुरक्षा संवाद'।

उपस्थिति और जन-सहयोग

​इस भव्य आयोजन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मणिशंकर चंद्रा, सीएसपी श्री अभिषेक चतुर्वेदी, आरटीओ अब्दुल मुजाहिद सहित पूरा पुलिस अमला, स्काउट-गाइड के सदस्य और समाजसेवी संगठनों ने कंधे से कंधा मिलाकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

फैसला आपका है...

धमतरी पुलिस का यह अभियान एक 'जीवन रक्षक मंत्र' है। घर से निकलते वक्त जब आप हेलमेट पहनते हैं, तो आप सिर्फ अपना सिर नहीं ढंकते, बल्कि अपने बूढ़े मां-बाप की उम्मीदों और बच्चों के भविष्य को ढंकते हैं।

याद रखिये—"आपकी एक पल की जल्दबाजी, आपके परिवार को उम्र भर का इंतजार दे सकती है।"

Comments


bottom of page