मगरलोड का 'मरीन ड्राइव' बनेगा मेघा-गिरौद तटबंध! महानदी किनारे अब 'कटाव' नहीं, होगा 'पर्यटन और व्यापार' का विस्तार
- moolchand sinha

- Jan 18
- 2 min read

कुरूद।
महानदी का जो पानी अब तक किनारों की 'मिट्टी' और 'भूभाग' को निगल रहा था, अब वही किनारा मेघा मगरलोड क्षेत्र की 'आर्थिक और सामाजिक धड़कन' बनने जा रहा है। कुरुद विधायक अजय चंद्राकर की पहल पर स्वीकृत मेघा से गिरौद तटबंध निर्माण परियोजना ने क्षेत्र की तस्वीर बदलने की नींव रख दी है। यह प्रोजेक्ट सिर्फ बाढ़ रोकने वाली दीवार नहीं, बल्कि एक 'मल्टी-पर्पस कॉरिडोर' है, जहाँ सुरक्षा के साथ-साथ पर्यटन, शिक्षा और व्यापार का संगम होगा।
हर वर्ग, हर पहलू - तार्किक विश्लेषण
अस्तित्व की सुरक्षा: रेत और मिट्टी का कटाव अब 'इतिहास'
सबसे बुनियादी और अहम बात—महानदी का तेज बहाव हर साल मेघा से गिरौद के बीच की बेशकीमती जमीन को काट रहा था। रेत के कटाव से किसानों का 'भूभाग' कम हो रहा था।
इस तटबंध (Embankment) के बनने से मिट्टी का कटाव पूरी तरह रुक जाएगा। जो जमीन नदी में समा रही थी, वह अब सुरक्षित होगी। यानी "किसान की जमीन भी बचेगी और जान भी।"
पर्यटन और सौंदर्यीकरण: सुरक्षित और विकसित 'पिकनिक स्पॉट'
तटबंध के ऊपरी हिस्से का सौंदर्यीकरण (Beautification) इसे एक पर्यटन स्थल में बदल देगा।
नया नज़ारा: शाम के वक्त महानदी का किनारा, सुरक्षित बाउंड्री और पक्का रास्ता—यह पर्यटकों को आकर्षित करेगा। जब पर्यटक आएंगे, तो क्षेत्र का विकास स्वतः होगा। यह क्षेत्र सुरक्षित पर्यटन के नक्शे पर उभरेगा।
फुटकर व्यापारी और लोकल इकोनॉमी:
पर्यटन बढ़ने का सीधा असर 'फुटकर व्यवसायियों' (Street Vendors) पर पड़ेगा।
जहाँ भीड़ होगी, वहां बाजार सजेगा। चाट, ठेले और छोटे दुकानदारों के लिए मेघा-गिरौद तटबंध रोजगार का नया केंद्र बनेगा। यह 'लोकल इकोनॉमी' को बूस्ट करने वाला कदम है
ट्रैफिक व्यवस्था और राहगीरों के लिए 'नया बाईपास':
अभी तक उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरने वाले राहगीरों के लिए यह तटबंध एक सुगम वैकल्पिक मार्ग (Alternative Route) साबित होगा।
फायदा: इससे मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और मेघा से गिरौद के बीच आवागमन तेज और सुरक्षित हो जाएगा।
छात्र, शिक्षा और स्वास्थ्य: कनेक्टिंग इंडिया
छात्र-छात्राएं: स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों को अब कीचड़ और पानी से नहीं जूझना होगा। उनकी साइकिलें अब सरपट दौड़ेंगी।
स्वास्थ्य (Health): एंबुलेंस और मरीजों के लिए यह रास्ता 'जीवन रक्षक' बनेगा। अस्पताल पहुंचने का समय आधा हो जाएगा, जो आपातकाल में किसी की जान बचा सकता है।
विजनरी लीडरशिप
कुल मिलाकर, ₹87.97 लाख की यह स्वीकृति केवल एक सरकारी फाइल का पास होना नहीं है। यह अजय चंद्राकर की उस सोच का परिणाम है, जो जानते हैं कि एक 'तटबंध' कैसे किसान के खेत से लेकर फुटकर व्यापारी की जेब तक खुशहाली ला सकता है।
अब मगरलोड मेघा के पास अपना खुद का एक रिवर-फ्रंट होगा—सुरक्षित, सुंदर और विकसित।








Comments