मगरलोड की मिट्टी से निकला ‘डायमंड’: परसवानी के युवा ने UPSC में 623वीं रैंक से बढ़ाया धमतरी का मान
- moolchand sinha

- 2 days ago
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धमतरी।
संघर्ष की कोख से जब संकल्प जन्म लेता है, तो सफलता की गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई देती है। धमतरी जिले के मगरलोड क्षेत्र का एक छोटा सा गांव 'परसवानी' आज राष्ट्रीय मानचित्र पर चमक रहा है। यहाँ के होनहार युवा डायमंड सिंह ध्रुव ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 623वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती।
साधारण पृष्ठभूमि, असाधारण लक्ष्य
स्वर्गीय श्री बलराम सूर्यवंशी (ADO) के सुपुत्र डायमंड सिंह ध्रुव ने अपनी इस सफलता से न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि उन हजारों ग्रामीण युवाओं को एक नया सपना देखने का साहस दिया है जो सीमित अवसरों के बीच पले-बढ़े हैं। उनकी यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि धमतरी की माटी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।
कलेक्टर ने थपथपाई पीठ: "आप हैं जिले के प्रेरणापुंज"
डायमंड की इस ऐतिहासिक जीत पर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने उनसे सौजन्य भेंट की। उन्होंने डायमंड को पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई देते हुए कहा कि:
"डायमंड की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह जिले के उन तमाम युवाओं के लिए एक रोडमैप है जो प्रशासनिक सेवाओं में जाना चाहते हैं। वे जिले के सच्चे रोल मॉडल हैं।"
इस गरिमामयी मुलाकात के दौरान जिला पंचायत सीईओ गजेन्द्र सिंह ठाकुर और एसडीएम कुरूद श्री नभ सिंह कोसले सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी डायमंड के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मगरलोड: अब बन रहा है 'अफसरों की नर्सरी'
कभी पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाने वाला मगरलोड अब 'अफसरों के गढ़' के रूप में अपनी नई पहचान बना रहा है। सुश्री पूजा साहू (IAS) की सफलता के बाद डायमंड ध्रुव की यह लगातार दूसरी बड़ी उपलब्धि है।
क्षेत्र में बदलाव की लहर:
प्रशासनिक सेवा: UPSC के साथ-साथ PSC और SSC परीक्षाओं के प्रति युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ा है।
वर्दी का जुनून: केवल कलम ही नहीं, मगरलोड के युवाओं का पराक्रम सरहदों पर भी दिख रहा है। इस वर्ष अकेले इस क्षेत्र से 28 से अधिक युवाओं का भारतीय सेना में चयन होना एक रिकॉर्ड है।
नया छत्तीसगढ़, नई उड़ान
डायमंड ध्रुव की यह कामयाबी ग्रामीण छत्तीसगढ़ की उस बदलती तस्वीर को बयां करती है, जहाँ अब युवा अभावों का रोना नहीं रोते, बल्कि अपनी मेहनत से अपना भाग्य खुद लिखते हैं। परसवानी से दिल्ली तक का यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बना रहेगा।



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