मासूम चेहरों के पीछे छिपे थे 'नशे के सौदागर', पुलिस ने बीच सड़क पर डिकोड की 'कोबरा-तकनीक'
- moolchand sinha

- Jan 15
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धमतरी/अर्जुनी: चेहरे पर शराफत का नकाब और बैग में बर्बादी का सामान... अपराधियों ने सोचा था कि उनकी यह 'कमोफ्लाज' (छलावा) तकनीक पुलिस की नज़रों से बच निकलेगी। एक युवक और एक युवती, जो देखने में किसी आम यात्री की तरह लग रहे थे, असल में 'सफेदपोश तस्कर' निकले। लेकिन अर्जुनी पुलिस का खुफिया तंत्र इतना मजबूत था कि अपराधियों की 'मास्टर-की' काम नहीं आई और धमतरी-नगरी मार्ग पर उनके 'ब्लैक-ऑपरेशन' का पर्दाफाश हो गया।
क्राइम सीन अपडेट: (The Crime Scene Breakdown)
. मुखबिर का 'सटीक इनपुट' (The Perfect Intel)
पुलिस को हवा में तीर चलाने की आदत नहीं है। अर्जुनी थाना प्रभारी के पास 'पिन-पॉइंट इंफॉर्मेशन' थी। इनपुट साफ़ था—ग्राम भोयना के रास्ते नशे की एक बड़ी खेप (Consignment) गुज़रने वाली है। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से सड़क को अपने 'सुरक्षा घेरे' (Security Grid) में ले लिया।
'मासूमियत' का ड्रामा और पुलिस का 'प्रहार'
जैसे ही बजाज मोटरसाइकिल पर सवार तिलेश सिंह ठाकुर (27) और तरूणा सिंह राजपूत (26) नाकेबंदी पर पहुंचे, उनकी 'बॉडी लैंग्वेज' ने दगा दे दिया। वे पुलिस को देखकर सामान्य दिखने की कोशिश (Acting) कर रहे थे, लेकिन पुलिस की पारखी नज़रों ने भांप लिया कि "दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।"
बैग खुलते ही सामने आया 'ज़खीरा' (The Inventory)
जब तलाशी ली गई, तो पुलिस के हाथ 12.538 किलोग्राम गांजा लगा। यह महज गांजा नहीं, बल्कि युवाओं को खोखला करने वाला ज़हर था।
बरामदगी का गणित: 1.25 लाख का नशा + 2.85 लाख की बाइक + 33 हज़ार के हाई-टेक मोबाइल्स।
कुल प्रहार: पुलिस ने तस्करों के 4.43 लाख रुपये के नेटवर्क को ध्वस्त (Destroy) कर दिया।
कोरबा टू धमतरी: 'सप्लाई चेन' का द एंड
कोरबा के पॉश इलाकों से निकले ये आरोपी धमतरी में अपने पैर जमाना चाहते थे। लेकिन अर्जुनी पुलिस ने NDPS एक्ट की धारा 20(B) का ऐसा फंदा कसा है कि अब जमानत तो दूर, जेल की रोटियाँ ही इनका नया नसीब होंगी। पुलिस अब इनके मोबाइल डेटा को 'स्कैन' कर रही है ताकि इस रैकेट के 'किंगपिन' (मुख्य सरगना) की गर्दन तक पहुँचा जा सके।








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