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सौदा आबरू का: 'नौकरी' के लिए बुलाई गई महिला को थमाए 200 रुपए; बलरामपुर में दरिंदगी की इंतेहा

बलरामपुर/वाड्रफनगर:

रिश्ते खून के हों या भरोसे के, जब उनमें 'हवस' की मिलावट हो जाए, तो अंजाम कितना खौफनाक हो सकता है, इसकी बानगी छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में देखने को मिली। एक महिला को रोजगार की उम्मीद ने घर से बाहर निकाला, लेकिन मंजिल पर उसे काम नहीं, बल्कि वहशीपन मिला। वह भी अपनों से।

​वाड्रफनगर में इंसानियत को तार-तार कर देने वाली इस घटना में भरोसा, शराब और साजिश का ऐसा कॉकटेल तैयार किया गया, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है।

द ॱट्रैप: अंबिकापुर से वाड्रफनगर तक का 'छलावा'

​18 जनवरी की सर्द सुबह। अंबिकापुर में रहने वाली पीड़िता के फोन की घंटी बजती है। दूसरी तरफ उसका रिश्तेदार रविचंद उर्फ गुड्डू था। आवाज में अपनापन और बात 'काम' की थी।

"वाड्रफनगर आ जाओ, काम का इंतजाम हो गया है..."

​गरीबी और जरूरत ने सवाल पूछने की गुंजाइश नहीं छोड़ी। महिला उम्मीदों का थैला लेकर बस में बैठी और वाड्रफनगर बस स्टैंड पहुंच गई। वहां रविचंद उसका इंतजार कर रहा था। महिला को लगा कि संघर्ष के दिन खत्म हुए, लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि वह बाइक पर बैठकर काम की जगह नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी के सबसे काले अध्याय की ओर बढ़ रही है।

बंद कमरे में टूटता दम और हैवानियत

​रविचंद उसे लेकर एक सुनसान कमरे में पहुंचा। महिला कुछ समझ पाती, उससे पहले ही साजिश का दूसरा हिस्सा शुरू हो गया।

दस्तक: थोड़ी ही देर में दरवाजे पर दस्तक हुई। दो युवक—तेजमणी (18) और दीपक (20)—हाथों में शराब लिए अंदर दाखिल हुए।

साजिश: रविचंद ने अपने साथियों के साथ पहले शराब पी। जब नशा सिर चढ़ गया, तो उनकी नजरें महिला पर टिक गईं।

क्लाइमैक्स: महिला को जबरदस्ती शराब पिलाई गई। वह चीखती रही, रिश्ते की दुहाई देती रही, लेकिन बंद कमरे की दीवारों ने उसकी आवाज सोख ली। तीनों ने बारी-बारी से उसे अपनी हवस का शिकार बनाया।

शर्मनाक विदाई: 200 रुपए और बस का टिकट

​दरिंदगी के बाद जो हुआ, वह शारीरिक घावों से भी ज्यादा गहरा जख्म दे गया। मुख्य आरोपी ने बदहवास पीड़िता के हाथ में 200 रुपए रखे—मानो यह उसकी अस्मिता की कीमत थी—और उसे बस में बैठाकर घर भेज दिया।

​अंबिकापुर लौटते ही महिला का शरीर और मन जवाब दे गया। परिजन उसे लेकर मेडिकल कॉलेज भागे, जहां डॉक्टरों ने उस सच की पुष्टि कर दी, जिसे महिला छिपाना चाहती थी—गैंगरेप।

पुलिस का एक्शन: जीरो FIR और तीन गिरफ्तारियां

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने भी पारंपरिक सुस्ती तोड़ी।

जीरो एफआईआर: अंबिकापुर कोतवाली ने बिना घटनास्थल के विवाद में पड़े 'शून्य' पर मामला दर्ज किया और फाइल वाड्रफनगर भेजी।

दबिश: पुलिस ने लोकेशन ट्रेस की और अंबिकापुर से ही तीनों आरोपियों (रविचंद, तेजमणी, दीपक) को उठा लिया।

सलाखें: 20 जनवरी को कोर्ट ने तीनों को जेल भेज दिया। तीनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

बलरामपुर 'क्राइम जोन' क्यों बन रहा है?

​यह महज एक अपराध नहीं, बल्कि बलरामपुर की कानून-व्यवस्था पर लगा एक और बदनुमा दाग है।

पैटर्न: अभी नवंबर माह में सनावल में चाची-भतीजी के साथ हुए गैंगरेप की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि वाड्रफनगर की घटना ने पुलिसिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सामाजिक पतन: एक 38 साल का रिश्तेदार (रविचंद) और उसके साथ 18 व 20 साल के युवा (तेजमणी और दीपक)। यह बताता है कि समाज में अपराध की जड़ें किस कदर युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं।

​फिलहाल, पीड़िता अस्पताल में है, हालत स्थिर है, लेकिन सवाल वही है—क्या 200 रुपए और 20 साल की सजा किसी की टूटी हुई रूह को जोड़ पाएगी?

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