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​सन्नाटे में 'खेला' हो गया! रेलवे ट्रैक, 120 सरिये और एक मेटाडोर... धमतरी पुलिस ने ऐसे खोदा 'सितंबर' का गड़ा मुर्दा राज

"धमतरी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: पुलिस गिरफ्त में अंतर-जिला गिरोह के 07 सदस्य, घटना में प्रयुक्त मेटाडोर और बरामद रेलवे निर्माण सामग्री।"
"धमतरी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: पुलिस गिरफ्त में अंतर-जिला गिरोह के 07 सदस्य, घटना में प्रयुक्त मेटाडोर और बरामद रेलवे निर्माण सामग्री।"

धमतरी | स्पेशल रिपोर्ट

​सितंबर 2025 की वो रात बेहद अंधेरी थी। ग्राम कन्हारपुरी के पास रेलवे के निर्माणाधीन टीएसएस (TSS) साइट पर सन्नाटा पसरा हुआ था, लेकिन उस सन्नाटे में एक साजिश रची जा रही थी। एक मेटाडोर आती है, चंद मिनटों में लाखों का माल गायब होता है और पीछे छूट जाते हैं सिर्फ टायरों के निशान।

​यह महज चोरी की घटना नहीं थी, बल्कि एक अंतर-जिला संगठित गिरोह (Inter-district Organized Syndicate) का दुस्साहस था। लेकिन, धमतरी पुलिस ने जिस तरह से कड़ियों को जोड़ा, उसने साबित कर दिया कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून की पकड़ से भाग नहीं सकता।

​एसपी धमतरी के निर्देशन में कुरूद पुलिस ने 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' के तहत न केवल 07 शातिर अपराधियों को दबोचा है, बल्कि चोरी गया शत-प्रतिशत माल (100% Recovery) भी बरामद कर लिया है।

क्राइम सीन: वो 60 मिनट जिसने सब बदल दिया

तारीख: 08-09 सितंबर 2025 की दरमियानी रात।

समय: 02:00 से 03:00 बजे के बीच।

जगह: रेलवे टीएसएस साइट, ग्राम कन्हारपुरी।

​जब पूरा इलाका नींद में था, तब एक शातिर गैंग अपना काम कर रहा था। उनका टारगेट था—32 एमएम की भारी-भरकम लोहे की सरिया। चोरों ने पूरी योजना के साथ 120 नग सरिये (कीमत करीब 1.80 लाख रुपये) मेटाडोर में लादे और हवा हो गए। सुबह जब सुपरवाइजर अमन कुमार दुबे साइट पर पहुंचे, तो वहां सिर्फ खाली जमीन थी। 09 सितंबर को कुरूद थाने में धारा 303(2), 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज हुआ और पुलिस ने अपनी 'घड़ी' चालू कर दी।

जांच (Investigation): सुराग शून्य, लेकिन नेटवर्क मजबूत

​पुलिस के पास कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। मामला 'ब्लाइंड' था। लेकिन विवेचना अधिकारियों ने पारंपरिक पुलिसिंग और तकनीकी सर्विलांस का हाइब्रिड मॉडल अपनाया।

पहला ब्रेकथ्रू: मुखबिर तंत्र सक्रिय हुआ। खबर मिली कि इलाके में कुछ संदिग्धों को देखा गया था।

संदेही की पहचान: सुई विष्णु दास मानिकपुरी पर जाकर रुकी। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। पहले उसने ना-नुकर की, लेकिन जब पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य सामने रखे, तो वह टूट गया।

द सिंडिकेट: भिलाई से बिहार तक जुड़े तार

​विष्णु दास के मेमोरेंडम ने पुलिस को चौंका दिया। यह कोई स्थानीय चोरी नहीं थी। इसमें दुर्ग, भिलाई, रायपुर और बिहार के अपराधी शामिल थे। एक के बाद एक गिरफ्तारियां हुईं और गैंग का पूरा स्ट्रक्चर ताश के पत्तों की तरह बिखर गया।

​पुलिस ने एक साथ रेड मारकर कुल 07 लोगों को गिरफ्तार किया। इनके पास से घटना में प्रयुक्त मेटाडोर (CG-17-KK-2545) और आरोपी आकाश गुप्ता की निशानदेही पर पूरी 120 नग सरिया बरामद कर ली गई।

क्रिमिनल डोजियर: मामूली चोर नहीं, हिस्ट्रीशीटर हैं ये

​धमतरी पुलिस की यह कार्रवाई इसलिए भी अहम है क्योंकि पकड़े गए आरोपी आदतन अपराधी हैं। इनका रिकॉर्ड बताता है कि ये समाज के लिए कितने खतरनाक थे:

टी. शिव कुमार (30 वर्ष), भिलाई: इसके ऊपर पहले से हत्या का प्रयास (Attempt to Murder) और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं।

शेख फैजल (25 वर्ष), भिलाई: मारपीट और आबकारी एक्ट का पुराना खिलाड़ी।

विष्णु दास (42 वर्ष): सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में पहले भी पुलिस के रडार पर रहा है।

सलाखों के पीछे 'सात' चेहरे

​न्यायालय ने पुलिस द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों के आधार पर सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों की सूची इस प्रकार है:

मास्टरमाइंड व साथी: विष्णु दास (कुरूद), चंद्रभूषण सिंह (भिलाई), शेख फैजल (भिलाई), टी. शिव कुमार (भिलाई), ओमप्रकाश बंजारे (रायपुर), सुग्रीम राम (मूल निवासी बिहार, हाल रायपुर) और आकाश गुप्ता (रायपुर)।

💡 यह खबर क्यों मायने रखती है?

​अक्सर निर्माण स्थलों से चोरी की घटनाओं को 'छोटा अपराध' मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन धमतरी पुलिस ने जिस तत्परता से 1.80 लाख रुपये का पूरा माल रिकवर किया, वह एक मिसाल है। यह कार्रवाई उन संगठित गिरोहों के लिए एक कड़ा संदेश है जो विकास कार्यों में बाधा डालते हैं।

निष्कर्ष: रेलवे की संपत्ति सुरक्षित, अपराधी जेल में और पुलिस का इकबाल बुलंद। धमतरी पुलिस की इस सफलता ने बता दिया है कि सितंबर 2025 का यह मामला अब फाइलों में 'सुलझा हुआ' (Case Closed) दर्ज हो चुका है।

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