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सरकारी बाबू की 'हाईटेक' चोरी! जनता के पैसे से खेलता रहा ऑनलाइन गेम, अब सलाखों के पीछे।

कुरूद।

जब सरकारी फाइलों की रखवाली करने वाला ही सरकारी तिजोरी में सेंध लगा दे, तो सवाल उठना लाजिमी है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ एक डाटा एंट्री ऑपरेटर ने ऑनलाइन गेमिंग की अपनी 'वर्चुअल भूख' मिटाने के लिए सरकारी खजाने को 'रियल' चूना लगा दिया।

​धमतरी पुलिस ने मगरलोड जनपद पंचायत के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है, जिसने अपने ही विभाग की सीईओ के फर्जी हस्ताक्षर कर लाखों रुपये उड़ा दिए। यह कहानी सिर्फ गबन की नहीं, बल्कि उस डिजिटल नशे की भी है जो अब सरकारी दफ्तरों की चारदीवारी तक पहुँच चुका है।

​स्याह सच: कलम, कागज और फर्जीवाड़ा

​16 जनवरी 2026 की सुबह, मगरलोड थाने में एक लिखित आवेदन पहुँचता है। यह आवेदन किसी आम नागरिक का नहीं, बल्कि जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सुश्री दिव्या ठाकुर का था। शिकायत बेहद गंभीर थी—विभाग के बैंक खाते से पैसे गायब हो रहे थे।

​पुलिस ने जब फाइलों की धूल झाड़ी, तो शक की सुई सीधा उस शख्स पर गई, जिसका काम ही 'डाटा' का हिसाब रखना था। वह शख्स थे धर्मेंद्र साहू (36 वर्ष), जो वहीं डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर तैनात थे।

​मोडस ऑपरेंडी: भरोसे का कत्ल

​धर्मेंद्र साहू ने जो तरीका अपनाया, वह बेहद शातिराना था। उन्होंने तकनीक का नहीं, बल्कि पुराने 'मैनुअल' तरीके का फायदा उठाया।

  • चोरी: आरोपी ने कार्यालय से बेहद सफाई से 6 सरकारी चेक चोरी किए।

  • जालसाजी: उन चेकों पर सीईओ सुश्री दिव्या ठाकुर के हूबहू फर्जी हस्ताक्षर किए।

  • ट्रांसफर: चेक के जरिए कुल 8,52,795 रुपये की राशि धीरे-धीरे अपने एक्सिस बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के निजी खातों में ट्रांसफर कर ली।

​गेमिंग ऐप ने पहुंचाया सलाखों के पीछे

​पुलिस की विवेचना में जब आरोपी के बैंक ट्रांजेक्शन खंगाले गए, तो कहानी का दूसरा पहलू सामने आया। 1 जुलाई 2025 से 3 जनवरी 2026 के बीच, यानी करीब 6 महीनों में 8 लाख से ज्यादा की सरकारी रकम धर्मेंद्र के खाते में आई और तुरंत गायब हो गई।

​पूछताछ के दौरान धर्मेंद्र ने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला था। उसने पुलिस को बताया कि उसे "LM एप्लीकेशन" नामक एक ऑनलाइन गेमिंग ऐप की लत लग गई थी। जीतने की चाह और हारने की बौखलाहट में उसने जनता के विकास के लिए आए पैसों को जुए के दांव पर लगा दिया।

​पुलिस की कार्रवाई: बीएनएस (BNS) का शिकंजा

​धमतरी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की। आरोपी के पास से वह मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है, जिसके जरिए सरकारी पैसे को गेमिंग ऐप में उड़ाया जा रहा था।

​थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305(ई), 318(4), 338, 336 और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया है। न्यायालय में पेश करने के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।


आरोपी का प्रोफाइल:

  • नाम: धर्मेंद्र साहू

  • उम्र: 36 वर्ष

  • निवासी: नवागांव, थाना मगरलोड

  • पद: डाटा एंट्री ऑपरेटर


​व्यवस्था पर सवाल

​यह घटना प्रशासनिक तंत्र के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। सवाल यह है कि छह महीने तक सरकारी चेक चोरी होते रहे और फर्जी हस्ताक्षर से लाखों रुपये निकलते रहे, लेकिन किसी भी ऑडिट या मॉनिटरिंग सिस्टम ने इसका 'रेड फ्लैग' क्यों नहीं दिया?

​धमतरी पुलिस ने साफ कर दिया है कि वे वित्तीय अपराधों (Financial Crimes) पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं, लेकिन धर्मेंद्र साहू की गिरफ्तारी ने साबित कर दिया है कि ऑनलाइन गेमिंग की लत अब केवल व्यक्तिगत नुकसान तक सीमित नहीं है, यह संस्थागत अपराध का रूप ले रही है।

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