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सिर्री स्कूल के बच्चों के भविष्य को संवारने आगे आया माया जीवन फाउंडेशन: स्वेटर पाकर खिले मासूमों के चेहरे

​विजय दीप


कुरूद : किसी भी गाँव का भविष्य वहाँ के विद्यालयों की चहारदीवारी के भीतर तैयार होता है। यदि विद्यालय बेहतर होंगे और वहाँ के बच्चों को उचित संसाधन मिलेंगे, तो निश्चित रूप से गाँव का भविष्य भी उज्ज्वल होगा। इसी संकल्पना को चरितार्थ करते हुए 'माया जीवन फाउंडेशन' ने शिक्षा की अलख जगाने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल की है।

​शिक्षा के प्रति एक महत्वपूर्ण कदम

​गाँव के गरीब, मजदूर और मेहनतकश किसान परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। अक्सर संसाधनों के अभाव में इन जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई बाधित हो जाती है। बच्चों की शिक्षा अनवरत जारी रहे, इसके लिए उन्हें समय-समय पर स्कूली बच्चों को संसाधन

उपलब्ध कराया जाता है l

माया जीवन फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य यही है कि आर्थिक तंगी के कारण गाँव का कोई भी परिवार और बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। सिर्री स्कूल के बच्चों के लिए किया गया यह प्रयास उन्हें विद्यालय एवं शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

​कड़ाके की ठंड में मिली ममता की गर्माहट

​शीतकालीन मौसम के बढ़ते प्रकोप और गिरते तापमान को देखते हुए, फाउंडेशन ने स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा। स्कूल प्रांगण में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान बच्चों को स्वेटर प्रदान किए गए। कड़ाके की ठंड से बचाव के लिए मिले इन उपहारों को पाकर बच्चों के चेहरे मुस्कान से चहक उठे। स्कूल का पूरा वातावरण उत्साह और खुशी से सबरोर नजर आया।

​आभार और प्रेरणा

​इस पुनीत कार्य के लिए ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन ने माया जीवन फाउंडेशन के संस्थापक देवा साहू को हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया है। उनकी इस दूरदर्शी सोच और निस्वार्थ सेवा भाव ने समाज के सामने एक मिसाल पेश की है ताकि समाज का हर तबका शिक्षित हो सके।

प्रमुख बिंदु:

  • संसाधनों का वितरण: जरूरतमंद बच्चों को कॉपी, पेन और अन्य जरूरी शैक्षणिक सामग्री भेंट की गई।

  • शीतकालीन सुरक्षा: ठंड से बचाव के लिए सभी बच्चों को स्वेटर वितरित किए गए।

  • संकल्प: गाँव का कोई भी गरीब परिवार शिक्षा की मुख्यधारा से पीछे न छूटे।

​संस्थापक देवा साहू का मानना है कि छोटा सा सहयोग भी किसी बच्चे के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। माया जीवन फाउंडेशन का यह प्रयास न केवल बच्चों को ठंड से बचाएगा, बल्कि उनके भीतर शिक्षा के प्रति एक नया उत्साह भी भरेगा।

 
 
 

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