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Bulldozer Action Dhamtari: आशियाना उजड़ते ही पीड़ित ने खाया जहर, प्रशासन के खिलाफ गांव में भड़का आक्रोश!


Bulldozer Action Dhamtari के दौरान बड़ा बवाल, पीड़ित ने किया जहर सेवन

अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान ज़हर खाने वाले पीड़ित चंपालाल साहू मगरलोड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  में भर्ती।

Bulldozer Action Dhamtari पर उठे भेदभाव के सवाल, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी


धमतरी के ग्राम छिपकली में 13 जून को अतिक्रमण हटाने के बुलडोजर कार्रवाई के दौरान विवाद। मौके पर मौजूद पुलिस और ग्रामीणों की भीड़।"

कुरूद/मगरलोड।

क्या कानून सबके लिए बराबर है या फिर कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित है? धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक के ग्राम छिपली में हुई Bulldozer Action Dhamtari ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम के सामने एक पीड़ित ग्रामीण द्वारा जहर सेवन किए जाने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।

जानकारी के अनुसार ग्राम छिपली में तहसीलदार मनोज भारद्वाज, पुलिस बल और पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में चंपालाल साहू के पशु आवास को मुक्तिधाम की आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण बताते हुए हटाया गया। कार्रवाई के दौरान देखते ही देखते निर्माण मलबे में तब्दील हो गया। परिवार का दावा है कि उक्त भूमि उन्हें वर्षों पहले ग्रामीणों की सहमति से उपयोग के लिए दी गई थी।

Bulldozer Action Dhamtari के बीच उठाया आत्मघाती कदम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार्रवाई से व्यथित चंपालाल साहू ने मौके पर ही जहर सेवन कर लिया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गंभीर हालत में उन्हें मगरलोड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। इस घटना के बाद पूरे गांव में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया है।

ग्रामीणों का आरोप: Bulldozer Action Dhamtari में हुई पक्षपातपूर्ण कार्रवाई

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में कई स्थानों पर अतिक्रमण मौजूद है, लेकिन कार्रवाई केवल दो परिवारों तक सीमित रही। उनका कहना है कि यदि प्रशासन अतिक्रमण हटाने के लिए प्रतिबद्ध है तो कार्रवाई सभी पर समान रूप से होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हटाए गए मलबे और निर्माण सामग्री को ट्रैक्टरों के जरिए अन्यत्र ले जाया जा रहा था। विरोध बढ़ने के बाद मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा और एसडीएम नभ सिंह कोसले के निर्देश पर सामग्री स्थानांतरण की प्रक्रिया रोक दी गई।

Bulldozer Action Dhamtari के बाद प्रशासन पर उठे बड़े सवाल

पीड़ित परिवार का कहना है कि गांव में अन्य स्थानों पर भी अतिक्रमण मौजूद है, लेकिन कार्रवाई केवल उनके खिलाफ की गई। परिवार ने इसे भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताते हुए निष्पक्ष जांच और समान कार्रवाई की मांग की है।

घटना के बाद ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि गांव के सभी अतिक्रमणों पर समान कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

सबसे बड़ा सवाल

क्या Bulldozer Action Dhamtari केवल अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई थी, या फिर इसके पीछे गांव की पुरानी रंजिशें और प्रभावशाली लोगों का दबाव भी काम कर रहा था? यह सवाल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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