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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन: विपक्ष के वार के बाद अब 'अपनों' ने ही दिखाई सरकार को हकीकत; समितियों को बचाने कुरुद से उठी आवाज



कुरुद के 35 प्रधिकृत अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन सौंपते हुए तस्वीर

कुरुद।

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का सीजन बीतने के बाद अब उसकी 'सूखत' (वजन की कमी) ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कुरुद विधानसभा क्षेत्र में एक दिलचस्प राजनीतिक मोड़ आया है, जहाँ विपक्ष की घेराबंदी के बाद अब सत्ता पक्ष के ही 35 मनोनीत प्रधिकृत अधिकारियों ने अपनी सरकार को जमीनी हकीकत का आईना दिखाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन पत्र में समितियों की 'आर्थिक कंगाली' का जो कच्चा चिट्ठा खोला गया है, उसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

**ज्ञापन का सियासी असर: क्या कांग्रेस के आरोपों पर 'अपनों' ने लगा दी मुहर?

कुरुद के गलियारों में चर्चा गरम है कि आखिर क्यों सत्ता पक्ष के मनोनीत पदाधिकारियों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन लिखना पड़ा? असल में, विपक्ष के हमलों ने एक ऐसा दबाव बनाया कि समितियों के अस्तित्व को बचाने के लिए अब भाजपा के ही जमीनी नेताओं को अपनी सरकार को हकीकत बताने के लिए आगे आना पड़ा है।

"तारणि नीलम चंद्राकर का 'चुभता' प्रहार: "समितियों को कंगाल बनाने की साजिश कर रही सरकार""

कुरुद की राजनीति में तारणि नीलम चंद्राकर ने सरकार की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर राज्य सरकार की नीतियों को 'समितियों का डेथ वारंट' करार दिया। तारणि ने आरोप लगाया कि धान खरीदी के प्रबंधन में विफलता का सारा बोझ समितियों पर डालकर उन्हें दिवालिया बनाया जा रहा है।

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**ज्ञापन में दर्ज समितियों का 'डेथ वारंट': 1% सूखत राशि की संजीवनी अनिवार्य

​मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र में उन 5 गंभीर कारणों को गिनाया गया है, जो समितियों की कमर तोड़ रहे हैं:

पत्र में उन तकनीकी कारणों का उल्लेख किया गया है जिनकी वजह से सहक

बफर लिमिट से ज्यादा स्टॉक और परिवहन में भारी देरी

इस वर्ष धान का स्टॉक बफर लिमिट से 4 गुना अधिक था। परिवहन (Transportation) में हुई देरी के कारण धान केंद्रों में पड़ा-पड़ा सूखता रहा, जिसका सीधा खामियाजा समितियों को भुगतना पड़ रहा है।

नमी का खेल और संग्रहण केंद्रों का दोहरा मापदंड

हैरानी की बात है कि शासन संग्रहण केंद्रों (Collection Centers) को तो सूखत राशि प्रदान कर रहा है, लेकिन जहाँ धान सबसे लंबे समय तक रखा रहा, उन उपार्जन केंद्रों को इस लाभ से वंचित रखा गया है। 16% नमी पर खरीदा गया धान उठान तक 12% ही रह गया।

राइस मिलों का DO और मार्च तक का इंतजार

धान की कटाई नवंबर-दिसंबर में हो जाती है, लेकिन मिलों का डिलीवरी ऑर्डर (DO) मार्च तक काटा गया। 4 महीने के इस अंतराल में प्रति क्विंटल 5 किलो तक की सूखत दर्ज की गई है।

आर-पार की लड़ाई: कुरुद के 35 'सेनापतियों' की मुख्यमंत्री से दो टूक मांग

​अधिकारियों ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि यदि 1% अतिरिक्त सूखत राशि नहीं मिली, तो सहकारी समितियां आर्थिक रूप से ध्वस्त हो जाएंगी। मांग केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि समितियों को 'कंगाल' होने से बचाने की एक आखिरी कोशिश है।

35 प्रधिकृत अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से दो टूक मांग की है कि समितियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए:

ऑनलाइन मॉड्यूल में प्रदर्शित शेष मात्रा का निराकरण शासन स्तर पर हो।

कुल खरीदी पर 1 प्रतिशत अतिरिक्त सूखत राशि तुरंत प्रदान की जाए।

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