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नवागांव का 'नशा-मुक्त' संकल्प: सार्वजनिक स्थलों पर शराब पीने वालों के खिलाफ सरपंच की 'क्लीन स्वीप' मुहिम


"नवागांव का नशा-मुक्त अभियान: ग्रामीणों का मिला साथ"

धमतरी (कुरूद)।

जब इरादे चट्टानी हों और नेतृत्व में धार हो, तो बदलाव की आंधी को कोई रोक नहीं सकता। धमतरी के कुरूद ब्लॉक के नवागांव ने नशे के सौदागरों और सार्वजनिक स्थलों पर जाम छलकाने वालों के खिलाफ सीधी 'जंग' का ऐलान कर दिया है। इसे महज एक सरकारी फैसला समझने की भूल न करें—यह नवागांव की मिट्टी और उसकी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को बचाने के लिए युवा सरपंच टिकेश साहू द्वारा फूंका गया वो 'नशा-मुक्त' शंखनाद है, जिसकी गूंज से अब नशेड़ियों के खेमे में हड़कंप मच गया है।

अब न गलियों में शराब की बदबू होगी, न चौराहों पर बोतलों का ढेर; नवागांव ने साफ कह दिया है—"हमारी मर्यादा से बढ़कर कुछ भी नहीं।"

सार्वजनिक स्थलों पर जाम छलकाया तो होगी कानूनी और सामाजिक कार्रवाई

ग्राम पंचायत नवागांव की विशेष बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि गांव की सीमाओं के भीतर आने वाले किसी भी चौक, चौराहे, गली या सरकारी भवन के पास शराब पीना पूरी तरह वर्जित होगा।

चौक-चौराहों और सड़कों पर पैनी नजर

सरपंच टिकेश साहू ने बैठक में स्पष्ट किया कि अक्सर शाम ढलते ही मुख्य रास्तों और चौक-चौराहों पर नशाखोरी का माहौल बन जाता था। इससे न केवल गांव की शांति भंग होती थी, बल्कि आने-जाने वाली महिलाओं और बच्चों को असुरक्षा महसूस होती थी। अब पंचायत की विशेष टीम और ग्रामीण युवा इन स्थानों पर नजर रखेंगे।

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगेगा भारी जुर्माना

पंचायत ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक स्थलों पर नशा करते पाए जाने पर न केवल आर्थिक दंड लगाया जाएगा, बल्कि बार-बार नियम तोड़ने वालों की सूचना पुलिस प्रशासन को देकर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

नवागांव का 'नशा-मुक्त' मॉडल: संस्कृति और भविष्य बचाने की मुहिम

सरपंच टिकेश साहू ने इस फैसले को गांव की अस्मिता से जोड़ते हुए कहा कि विकास केवल कंक्रीट की सड़कों से नहीं आता, बल्कि समाज के चरित्र से आता है।

"हमारी संस्कृति में नशा घर-घर तक पहुंच जाए, यह स्वीकार्य नहीं है। सुबह सड़क किनारे शराब की खाली बोतलें मिलना समाज के पतन का संकेत है। नवागांव का 'नशा-मुक्त' होना हमारी आने वाली पीढ़ी के सुनहरे भविष्य की गारंटी है।" — टिकेश साहू, सरपंच

ग्रामीणों ने एक सुर में कहा- 'नशा मुक्त नवागांव, गौरवशाली नवागांव'

इस फैसले का गांव में व्यापक स्वागत हुआ है। विशेषकर महिलाओं और युवाओं ने सरपंच की इस पहल को 'ऐतिहासिक' करार दिया है। ग्रामीणों का मानना है कि इस निर्णय से गांव में होने वाले छोटे-मोटे झगड़ों और घरेलू हिंसा में भी भारी कमी आएगी।

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