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कुरुद में हाहाकार: सरकारी दुकानों में 'देशी प्लेन' शराब की किल्लत, महुआ के भरोसे मदिरा प्रेमी; स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा


"सरकारी दुकानों में देशी शराब की किल्लत के बाद महुआ शराब की ओर रुख करते मदिरा प्रेमी। (प्रतीकात्मक तस्वीर)"

कुरुद/धमतरी:

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में पहली बार एक ऐसी स्थिति निर्मित हुई है जिसने आबकारी विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले की सरकारी दुकानों में देशी प्लेन शराब की भारी कमी हो गई है। पसंदीदा ब्रांड न मिलने से निराश मदिरा प्रेमी अब विकल्प के तौर पर अवैध महुआ शराब का सेवन कर रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकती है।

सरकारी दुकानों में देशी प्लेन शराब का संकट: क्या है जमीनी हकीकत?

आबकारी विभाग गुणवत्तायुक्त और किफायती शराब उपलब्ध कराने का दावा तो करता है, लेकिन कुरुद की भट्ठियों में पिछले कुछ दिनों से देशी प्लेन शराब के रैक खाली पड़े हैं।

अमृत समान क्रेज: देशी ठेकों में सबसे ज्यादा बिकने वाली 'प्लेन मदिरा' के न मिलने से शौकीनों में भारी आक्रोश है।

सप्लाई चेन पर सवाल: विभागीय माध्यमों से दुकानों तक पहुंचने वाली शराब की आपूर्ति अचानक क्यों रुकी, इस पर अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।

कोपेडीह की 'कच्ची' का बढ़ता कारोबार: ₹80 की बोतल ₹200 के पार

सरकारी शराब न मिलने के कारण अब लोग कोपेडीह जैसे गांवों का रुख कर रहे हैं। यह इलाका वर्षों से महुआ शराब के अवैध निर्माण के लिए जाना जाता है।

कीमतों में भारी उछाल: मांग बढ़ते ही अवैध कारोबारियों ने चांदी काटना शुरू कर दिया है। ₹80 वाली बोतल अब ₹200 में बेची जा रही है।

मिलावट का डर: ग्राहकों का आरोप है कि महुआ शराब में गर्म पानी मिलाकर धड़ल्ले से ठगी की जा रही है, जो लिवर और स्वास्थ्य के लिए 'जहर' समान है।

आबकारी विभाग की सुस्ती: कार्यवाही सिर्फ कागजों पर?

कोपेडीह में वर्षों से चल रहे इस खेल पर प्रशासन की नजर तो है, लेकिन सख्ती नदारद है।

पिछला रिकॉर्ड: कलेक्टर नम्रता गांधी और एसपी अंजनेय वार्ष्णेय के नेतृत्व में साल भर पहले हुई बड़ी कार्यवाही में 15 लोग जेल भेजे गए थे।

वर्तमान स्थिति: वर्तमान में आबकारी विभाग की 'दबिश' तो होती है, लेकिन प्रकरण दर्ज न होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। क्या वाकई अधिकारियों को अवैध भट्ठियों का लहान और शराब नजर नहीं आ रहा?


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