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गजराज जैन: धमतरी की सियासत का वो 'सूरज' जिसने लिखा jansangh-ka-itihas-dhamtari, अब यादों में शेष


  • jansangh-ka-itihas-dhamtari - स्वर्गीय गजराज जैन भाजपा धमतरी
    jansangh-ka-itihas-dhamtari - स्वर्गीय गजराज जैन भाजपा धमतरी

    धमतरी।

     राजनीति में जब निष्ठा और सिद्धांतों की बात होती है, तो स्वर्गीय गजराज जैन 'काका जी' का नाम सबसे ऊपर आता है। 92 वर्ष की आयु में उनका निधन धमतरी ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए एक युग का अंत है। वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि उस दौर के गवाह थे जब राजनीति केवल 'सेवा' का माध्यम हुआ करती थी।"धमतरी की सियासत और jansangh-ka-itihas-dhamtari लिखने में काका जी की भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी।"

    जनसंघ की नींव( jansangh-ka-itihas-dhamtari और गजराज जैन का संघर्ष) और धमतरी का पहला विधायक: एक ऐतिहासिक संघर्ष

    जिस समय देश में कांग्रेस का प्रचंड वर्चस्व था और सत्ता का नशा सिर चढ़कर बोल रहा था, उस कठिन कालखंड में गजराज जैन ने जनसंघ का 'दीपक' थामने का साहस किया। उन्होंने बाबू पंडरीराव कृदत्त, कृपाराम साहू और ताराचंद हिंदूजा जैसे महारथियों के साथ मिलकर संगठन की जड़ों को सींचा।

    यह काका जी की सूक्ष्म रणनीति और अटूट मेहनत का ही परिणाम था कि धमतरी से जनसंघ को बाबू पंडरीराव के रूप में पहला विधायक मिला। भाजपा के वरिष्ठ नेता भी मानते हैं कि काका जी की 'माइक्रो-प्लानिंग' और जनता की नब्ज पकड़ने की कला बेमिसाल थी।

    सादगी ऐसी कि पड़ोसी भी मानते थे 'अभिभावक'

    काका जी का व्यक्तित्व राजनीति से परे एक सामाजिक मार्गदर्शक का था। सिहावा चौक स्थित उनके पुराने निवास के आसपास रहने वाले लोग आज भी उनकी सादगी की चर्चा करते हैं। अब्दुल रजाक रिजवी के संस्मरण बताते हैं कि वे सुबह मंदिर जाते समय हर घर पर एक नजर जरूर डालते थे।

    संस्कारों की मिसाल: राजस्थान की मिट्टी से जुड़े संस्कार उनके भीतर कूट-कूट कर भरे थे। वे घर की बहू-बेटियों की मर्यादा का इतना सम्मान करते थे कि उनके सामने से गुजरते वक्त सिर झुका लिया करते थे।

    जब 'अटल' मुरीद हुए: मकई चौक का वो ऐतिहासिक किस्सा

    काका जी की संगठन क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मकई चौक वाली सभा थी। जब भीड़ का हुजूम उमड़ा, तो अटल जी दंग रह गए। रेस्ट हाउस में अटल जी ने विशेष रूप से काका जी को बुलाया, उनकी पीठ थपथपाई और वो ऐतिहासिक वाक्य कहा:

"जिस पार्टी के पास गजराज जैन जैसे कर्मठ और निस्वार्थ कार्यकर्ता हों, उसे विश्व की सबसे बड़ी ताकत बनने से कोई नहीं रोक सकता।"

समावेशी सोच: उनके लिए छोटा कार्यकर्ता हो या बड़ा नेता, संवाद का लहजा हमेशा आत्मीय रहा।

वैचारिक यात्रा

 जनसंघ से लेकर भाजपा के उदय तक के साक्षी और सारथी।

रणनीतिक कौशल

धमतरी क्षेत्र में 'किंगमेकर' की भूमिका, लेकिन पद की लालसा से मुक्त।

सामाजिक संस्कार

 राजस्थानी मर्यादाओं का पालन; पड़ोसियों के लिए एक अभिभावक की छवि।

मूल्य आधारित

राजनीति छोटे से छोटे कार्यकर्ता को 'नाम' से जानना और उसे सम्मान देना।

स्मृतियों में हमेशा जीवंत रहेंगे 'काका जी'

आज गजराज जैन जी हमारे बीच भौतिक रूप से नहीं हैं, लेकिन धमतरी की गलियों में उनके द्वारा बोए गए सिद्धांतों के बीज आज भाजपा के वटवृक्ष के रूप में लहलहा रहे हैं। उन्होंने सिखाया कि एक-एक व्यक्ति और एक-एक समाज को जोड़कर ही संगठन को सशक्त बनाया जा सकता है।

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