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दिल्ली में गूंजा बस्तर का परचम: बिहानों की बेटियाँ बनीं ‘मिलेनियर ’, सरकार ने सराहा हौसला

Dec 18, 2025
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रायपुर/बस्तर: कभी घने जंगलों और सीमित संसाधनों के नाम से पहचाना जाने वाला बस्तर, आज 'आत्मनिर्भर भारत' की नई और सुनहरी इबारत लिख रहा है। बस्तर की माटी की महक अब देश की राजधानी दिल्ली के गलियारों में गूंज रही है। बकावंड जनपद की दो साधारण दिखने वाली लेकिन असाधारण हौसलों वाली ग्रामीण महिलाओं—सुमनी कश्यप और नेत्री बाई कश्यप—ने दिल्ली के प्रतिष्ठित मंच पर “मिलेनियर फार्मर ऑफ इंडिया–2025” का राष्ट्रीय सम्मान हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों, तो बस्तर की पगडंडियाँ भी सफलता के राजमार्ग तक ले जाती हैं।

सरकार की नीतियों का सुखद प्रतिफल: केदार कश्यप

​बस्तर की इन बेटियों की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री केदार कश्यप ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा:

​"यह सम्मान केवल दो महिलाओं की जीत नहीं है, बल्कि यह मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के दूरदर्शी नेतृत्व और हमारी सरकार की 'नारी सशक्तिकरण' एवं 'ग्रामीण आत्मनिर्भरता' नीति की ज़मीनी सफलता का प्रमाण है। बस्तर की बेटियाँ अब बदलती तकनीक और नवाचार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।"


​बिहान: एक योजना जिसने बदली तकदीर

​सुमनी और नेत्री बाई की यह यात्रा संघर्ष से सफलता की एक जीवंत मिसाल है। बिहान योजना (NRLM) के साथ जुड़कर इन महिलाओं ने न केवल उन्नत कृषि प्रणालियों को सीखा, बल्कि पारंपरिक खेती में आधुनिक नवाचारों का समावेश किया। समूह आधारित उद्यमिता (Self Help Group Model) के माध्यम से उन्होंने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया और अपनी आमदनी को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।

प्रमुख सफलता के सूत्र:

तकनीकी प्रशिक्षण: परंपरागत तरीकों को छोड़कर आधुनिक सिंचाई और बीजों का प्रयोग।

बाज़ार संवर्धन: बिहान के माध्यम से सीधे बाज़ार और उचित मूल्य तक पहुँच।

समूह शक्ति: अकेले काम करने के बजाय समूह बनाकर संगठित उद्यमिता को बढ़ावा।

​ लाभार्थी से 'लीडर' बनने का सफर

​कैबिनेट मंत्री श्री केदार कश्यप ने ज़ोर देकर कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से महिलाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक दृष्टिकोण भी दिया जा रहा है। सरकार का विज़न है कि ग्रामीण महिलाएँ केवल योजनाओं की लाभार्थी न रहें, बल्कि वे समाज में नेतृत्वकर्ता (Leaders) और 'रोल मॉडल' के रूप में उभरें।

​बस्तर की नई पहचान: संघर्ष नहीं, सफलता

​आज सुमनी कश्यप और नेत्री बाई कश्यप बस्तर के हर स्वयं सहायता समूह और हर उस बेटी के लिए प्रेरणा का पुंज बन गई हैं, जो कुछ बड़ा करने का सपना देखती हैं। यह सफलता संदेश देती है कि बस्तर अब केवल अपनी चुनौतियों के लिए नहीं, बल्कि अपनी बेटियों की उपलब्धियों और उनके द्वारा लिखे जा रहे 'नवाचार' के अध्यायों के लिए पहचाना जाएगा।

बस्तर की इन 'मिलेनियर फार्मर्स' ने देश को बता दिया है कि छत्तीसगढ़ की नारी शक्ति अब थमने वाली नहीं है। दिल्ली के मंच पर मिला यह सम्मान बस्तर के विकास की उस नई ऊर्जा का प्रतीक है, जो आने वाले वर्षों में पूरे भारत को प्रेरित करेगी।

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