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धमतरी में रागी की खेती (Ragi Farming) से किसानों की बदली किस्मत: कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कलारबाहरा में परखा 'मिलेट मॉडल'


धमतरी रागी की खेती का निरीक्षण

धमतरी, छत्तीसगढ़।

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में पारंपरिक धान की खेती के बीच अब 'लाल सोना' यानी रागी अपनी चमक बिखेर रहा है। जिले के किसान अब फसल चक्र परिवर्तन (Crop Rotation) को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि कृषि के क्षेत्र में नए कीर्तिमान भी स्थापित कर रहे हैं।

धमतरी रागी की खेती से किसानों को मिल रहा है बंपर लाभ

हाल ही में कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने ग्राम पंचायत अरौद के ग्राम कलारबहरा का दौरा किया। यहाँ उन्होंने प्रगतिशील किसान सगनूराम नेताम के खेत में लहलहाती रागी की फसल का बारीकी से निरीक्षण किया।

बहुआयामी लाभ: किसान सगनूराम साल में 3 फसलें ले रहे हैं।

अतिरिक्त आय: खेत के पास डबरी निर्माण कर मछलीपालन के जरिए उन्होंने आय के नए स्रोत खोले हैं।

प्रशासनिक सराहना: कलेक्टर ने किसान के इस नवाचार को धमतरी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

धमतरी में फसल विविधीकरण के चौंकाने वाले आंकड़े

जिले में अब किसान दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा जारी ताजा आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं:

मिलेट्स और रागी का बढ़ता रकबा

धमतरी में वर्तमान में लगभग 1,250 हेक्टेयर क्षेत्र में रागी की खेती हो रही है, जिससे 1,180 से अधिक किसान सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं।

दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता

दलहन: कुल 18,450 हेक्टेयर में खेती (चना 14,200 हेक्टेयर के साथ शीर्ष पर)।

तिलहन: सरसों का दबदबा 8,300 हेक्टेयर तक पहुँच गया है, जबकि कुल तिलहन रकबा 9,600 हेक्टेयर है।

क्यों 'रागी' बन रही है धमतरी के किसानों की पहली पसंद?

रागी (मंडुआ) की खेती को बढ़ावा देने के पीछे प्रशासन और किसानों के पास ठोस कारण हैं:

कम पानी, अधिक सुरक्षा: जलवायु परिवर्तन के दौर में रागी कम पानी में तैयार होने वाली सबसे सुरक्षित फसल है।

पोषण सुरक्षा: कैल्शियम और आयरन से भरपूर रागी कुपोषण के खिलाफ एक बड़ा हथियार है।

महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं रोपाई और प्रसंस्करण के जरिए आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं।

कलेक्टर का विजन: धमतरी बनेगा मिलेट्स और दलहन का केंद्र

"हमारा प्राथमिक उद्देश्य किसानों को धान के मोह से निकालकर वैकल्पिक और लाभकारी फसलों की ओर ले जाना है। रागी, दलहन और तिलहन के माध्यम से हम मिट्टी की उर्वरता और किसानों की आर्थिक स्थिति, दोनों को सुरक्षित कर रहे हैं।"

अविनाश मिश्रा, कलेक्टर धमतरी

धमतरी के कलारबाहरा की यह तस्वीर साफ करती है कि यदि सही तकनीक और प्रशासनिक सहयोग मिले, तो रागी की खेती छोटे किसानों के लिए भी वरदान साबित हो सकती है। यह 'धमतरी मॉडल' अब पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक रोडमैप बन चुका है।


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