धमतरी के जंगलों में 'लाल आतंक' पर सबसे बड़ी चोट: 5 लाख की इनामी नक्सली ने खोला राज, जमीन फाड़कर निकलीं 'मौत की मशीनें'
- moolchand sinha

- Jan 20
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धमतरी (छत्तीसगढ़): जब हिंसा का रास्ता छोड़कर कोई मुख्यधारा में लौटता है, तो वह केवल एक व्यक्ति की वापसी नहीं होती, बल्कि पूरी विचारधारा पर एक प्रहार होता है। धमतरी के जंगलों में आज कुछ ऐसा ही हुआ। कल तक जो हाथों में बंदूक थामे 'लाल आतंक' का पर्याय थी, आज उसी ने पुलिस के साथ मिलकर माओवादियों की कमर तोड़ दी है।
धमतरी पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) ने एक बड़ी और रणनीतिक जीत हासिल की है। आत्मसमर्पित महिला नक्सली भूमिका उर्फ गीता की सटीक निशानदेही पर पुलिस ने जंगल के गर्भ में छिपा माओवादियों का एक बड़ा हथियार डम्प (Weapon Dump) बरामद किया है।
ऑपरेशन 'दौड़पंडरीपानी': कैसे मिली कामयाबी?
यह पूरी कार्रवाई आईजी रेंज रायपुर अमरेश मिश्रा के मार्गदर्शन और एसपी धमतरी के सीधे निर्देशन में अंजाम दी गई। जनवरी 2026 में ही हिंसा का रास्ता छोड़कर सरेंडर करने वाली 5 लाख की इनामी नक्सली भूमिका ने पुलिस को बताया कि माओवादियों ने दौड़पंडरीपानी (Daudpandripani) के घने जंगलों में भविष्य के हमलों के लिए हथियारों का जखीरा गाड़ रखा है।
सूचना मिलते ही DRG की टीम ने जंगल में 'स्पेशल नक्सल सर्च ऑपरेशन' शुरू किया। माओवादियों ने बेहद चालाकी से गड्ढा खोदकर, उसे पत्तियों और प्राकृतिक मलबे से ढककर हथियारों को छिपाया था ताकि सुरक्षाबलों की नजरों से बच सकें। लेकिन अपने ही पूर्व साथी की मुखबिरी से वे बच नहीं सके।
बरामद जखीरा: ऑटोमैटिक राइफल से लेकर भरमार बंदूक तक
जमीन खोदकर निकाले गए इस जखीरे को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि माओवादियों के मंसूबे कितने खतरनाक थे। बरामद हथियारों में शामिल हैं:
01 एसएलआर (SLR) 7.62 एमएम ऑटोमेटिक राइफल (मय सिलिंग) - यह एक घातक हथियार है जिसका इस्तेमाल सुरक्षाबलों के खिलाफ एम्बुश में किया जाता है।
02 एसएलआर की खाली मैग्जीन
01 12-बोर बंदूक (मय सिलिंग)
01 भरमार बंदूक (देसी मजल लोडिंग गन)
बदलाव की बयार: 'बंदूक से विश्वास' तक का सफर
यह केवल हथियारों की बरामदगी नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ शासन की 'आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति' की एक बड़ी जीत है। भूमिका उर्फ गीता का मुख्यधारा में लौटना और फिर अपने ही पुराने संगठन के खिलाफ पुलिस की मदद करना यह साबित करता है कि माओवादी विचारधारा अब अपने कैडर का विश्वास खो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक ऑटोमैटिक हथियार का पकड़ा जाना, माओवादियों की 'फायरपावर' को सीधा नुकसान पहुंचाना है।
पुलिस का संदेश: "हिंसा छोड़ें, जीवन चुनें"
धमतरी पुलिस ने इस सफलता को नक्सल उन्मूलन अभियान में एक 'माइलस्टोन' करार दिया है। पुलिस ने एक बार फिर अपील की है कि जंगल में भटक रहे अन्य माओवादी भी हिंसा का त्याग करें और शासन की नीतियों का लाभ उठाकर सम्मानजनक जीवन जिएं।
धमतरी के जंगलों में हुई यह कार्रवाई बताती है कि खुफिया तंत्र और पुनर्वास नीति का सही मिश्रण 'लाल आतंक' के खातमे की पटकथा लिख रहा है। भूमिका ने बंदूक छोड़ी, लेकिन उसकी दी हुई जानकारी ने कई बंदूकों को हमेशा के लिए शांत कर दिया।








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